खाते में 25 लाख, फिर भी इलाज को तरसी महिला — जनसुनवाई में छलका दर्द, सिस्टम पर उठे सवाल

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बीमारी से जूझ रही महिला अपने ही पैसे के लिए भटकने को मजबूर, सहकारी बैंक की कार्यप्रणाली पर फिर खड़े हुए प्रश्न
अतुल कुमार जैन, शिवपुरी | मंगलवार को जिला कलेक्ट्रेट शिवपुरी में आयोजित जनसुनवाई उस समय भावुक हो गई, जब एक गंभीर रूप से बीमार विवाहिता अपने मासूम बच्चे को साथ लेकर कलेक्टर के समक्ष पहुंची। महिला ने अपनी पीड़ा सुनाते हुए बताया कि बैंक में लाखों रुपये जमा होने के बावजूद वह इलाज के लिए तरस रही है और दर-दर भटकने को मजबूर है।
पीड़िता सोनिया त्रिपाठी, जो पुणे की निवासी हैं, ने अधिकारियों को बताया कि उनके दिमाग की दो नसों में खून के थक्के (क्लॉट) बन गए हैं। बीमारी के चलते उनकी हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है और वह ठीक से बोल भी नहीं पा रही हैं। आर्थिक तंगी के कारण उनका इलाज रुक गया है, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ती जा रही है।

25 लाख जमा, फिर भी इलाज के लिए मोहताज

सोनिया ने जानकारी देते हुए बताया कि शिवपुरी जिला सहकारी बैंक में उनके सेविंग खाते में लगभग 8 लाख रुपये और एफडी सहित कुल करीब 25 लाख रुपये जमा हैं। इतनी बड़ी राशि होने के बावजूद बैंक द्वारा उन्हें पूरी रकम नहीं दी जा रही है।
उन्होंने बताया कि बैंक से जो राशि किस्तों में दी जा रही है, वह इतनी कम है कि एक MRI जांच तक कराना संभव नहीं हो पा रहा। ऐसे में गंभीर बीमारी के बावजूद उनका इलाज अधूरा पड़ा हुआ है। सोनिया ने कहा कि “अपने ही पैसे के लिए इस तरह भटकना मेरी सबसे बड़ी मजबूरी बन गई है।”

घोटाले के बाद भी नहीं सुधरी स्थिति

गौरतलब है कि शिवपुरी सहकारी बैंक में करीब 100 करोड़ रुपये के घोटाले का मामला सामने आया था, जिसके चलते हजारों खाताधारकों की जमा राशि फंस गई थी। इस घोटाले ने कई परिवारों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया।
पिछले वर्ष प्रशासन और बैंक प्रबंधन द्वारा करीब 50 करोड़ रुपये की रिकवरी का दावा करते हुए शहर में जश्न मनाया गया था। उस समय यह उम्मीद जताई गई थी कि अब जमाकर्ताओं को राहत मिलेगी, लेकिन वर्तमान हालात इस दावे की सच्चाई पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

आयुष्मान कार्ड बना आखिरी उम्मीद

गंभीर बीमारी से जूझ रही सोनिया अब प्रशासन से आयुष्मान भारत योजना के तहत आयुष्मान कार्ड बनवाने की मांग कर रही हैं, ताकि वह किसी तरह अपना इलाज करा सकें।
विडंबना यह है कि एक ओर महिला के बैंक खाते में लाखों रुपये जमा हैं, वहीं दूसरी ओर वह इलाज के लिए सरकारी योजना का सहारा लेने को मजबूर है। यह स्थिति न केवल बैंकिंग व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता को भी उजागर करती है।

जनसुनवाई में उठी मानवीय संवेदनाओं की आवाज

जनसुनवाई में मौजूद अन्य लोगों ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। अधिकारियों ने महिला की समस्या सुनकर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

बड़ा सवाल : जिम्मेदार कौन?

यह मामला एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि जब किसी व्यक्ति की अपनी मेहनत की कमाई भी उसके काम नहीं आ रही, तो जिम्मेदारी किसकी तय की जाए? सहकारी बैंक की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक दावों के बीच फंसे ऐसे पीड़ित आज भी न्याय और राहत की उम्मीद में दर-दर भटक रहे हैं।
सोनिया त्रिपाठी की यह कहानी अकेली नहीं है, बल्कि उन हजारों लोगों की हकीकत है, जिनकी जमा पूंजी सहकारी बैंक घोटाले के बाद आज भी फंसी हुई है। यह मामला प्रशासन और बैंकिंग व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती और चेतावनी दोनों है कि अब केवल दावे नहीं, बल्कि जमीन पर राहत देने की जरूरत है।

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Atul Kumar Jain
Author: Atul Kumar Jain

अतुल कुमार जैन निरंतर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मध्यप्रदेश के शिवपुरी क्षेत्र की जमीनी खबरों, स्थानीय मुद्दों और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर इनकी विशेष पकड़ है। क्षेत्र की हर छोटी-बड़ी हलचल पर इनकी पैनी नजर रहती है। वर्तमान में तेजस रिपोर्टर के साथ जुड़कर शिवपुरी क्षेत्र की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और निष्पक्ष एवं प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से अपनी सशक्त पहचान बना रहे हैं।

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