मंडीदीप की वीएनएस कंपनी में श्रमिकों की जान से खिलवाड़! बिना सुरक्षा ऊंचाई पर वेल्डिंग, नियमों की खुलेआम उड़ रही धज्जियां

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📰 विशेष संवाददाता
मंडीदीप/रायसेन | भोपाल से सटे औद्योगिक क्षेत्र मंडीदीप में स्थित वीएनएस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। यहां कर्मचारी ऊंचाई पर वेल्डिंग जैसे खतरनाक कार्य बिना किसी सुरक्षा उपकरण के करते पाए गए, जिससे कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है।
‘न्यूनतम मजदूरी, PF-ESI पर भी सवाल – फाउंडेशन में उपजाऊ मिट्टी भरकर किया जा रहा निर्माण, प्रशासन से जांच की मांग’ 
सूत्रों के मुताबिक फैक्ट्री परिसर में मजदूर कई फीट ऊंचाई पर वेल्डिंग का काम कर रहे थे, लेकिन उनके पास न तो सुरक्षा बेल्ट, हेलमेट, वेल्डिंग शील्ड, दस्ताने या फायर रेसिस्टेंट कपड़े थे। हैरानी की बात यह है कि जब ऊपर खतरनाक काम चल रहा था, उसी दौरान नीचे भी कर्मचारी सामान्य रूप से काम कर रहे थे और वहां किसी प्रकार की सुरक्षा घेराबंदी (बेरिकेड्स) तक नहीं लगाई गई थी। ऐसे में किसी भी क्षण ऊपर या नीचे काम कर रहे श्रमिकों के साथ बड़ा हादसा हो सकता है।

दरअसल, औद्योगिक सुरक्षा से जुड़े नियमों के अनुसार खतरनाक कार्यों में लगे मजदूरों को नियोक्ता द्वारा पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE) जैसे हेलमेट, सुरक्षा जूते, दस्ताने, सेफ्टी बेल्ट और वेल्डिंग शील्ड उपलब्ध कराना अनिवार्य होता है, ताकि दुर्घटनाओं से बचाव हो सके।
अपुष्ट सूत्रों का दावा है कि कंपनी में काम करने वाले कई मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी तक नहीं दी जा रही, साथ ही उनके PF और ESI जैसी श्रमिक सुविधाओं में भी गड़बड़ी बताई जा रही है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सीधे तौर पर श्रम कानूनों और न्यूनतम मजदूरी अधिनियम का उल्लंघन माना जाएगा।

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इसी बीच फैक्ट्री परिसर में हो रहे अतिरिक्त निर्माण कार्य को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार फाउंडेशन भरने के लिए मुरम या अन्य मानक सामग्री की जगह खेती की उपजाऊ मिट्टी का उपयोग किया जा रहा है। सूत्रों का दावा है कि अब तक 500 से अधिक डंपर उपजाऊ मिट्टी यहां डाली जा चुकी है और यह सिलसिला लगातार जारी है। नियमों के मुताबिक कृषि योग्य भूमि की मिट्टी को औद्योगिक उपयोग के लिए निकालना अवैध माना जाता है।
इतना ही नहीं, कुछ सूत्रों ने यह भी आरोप लगाया है कि फैक्ट्री में काम करने वाले कई श्रमिक बांग्लादेशी हो सकते हैं, जिसकी स्वतंत्र जांच की आवश्यकता बताई जा रही है।
जब इस पूरे मामले को लेकर फैक्ट्री प्रबंधन से संपर्क किया गया तो फैक्ट्री मैनेजर ने मामले की गंभीरता को समझने के बजाय टालमटोल भरा रवैया अपनाया।
हमने कंपनी प्रबंधन का पक्ष जानने के लिए उन्हें व्हाट्सएप भी किया लेकिन ख़बर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं आया।
अब सवाल यह है कि औद्योगिक क्षेत्र में खुलेआम श्रमिकों की सुरक्षा से खिलवाड़ आखिर कब तक चलता रहेगा। ऐसे में इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों को निष्पक्ष जांच कर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि मजदूरों की जान से हो रहे इस खतरनाक खेल पर तुरंत रोक लग सके।

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This report is based on a sting operation conducted by the correspondent, including direct interactions and available audio-video recordings. The facts and claims mentioned herein are based on preliminary observations and are subject to independent verification. Any final determination of allegations or legal action rests solely with the competent administrative and judicial authorities. Any concerned party may submit its response, which will be published with due prominence.


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SURAJ MEHRA
Author: SURAJ MEHRA

साल 2022 से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत "सूरज मेहरा" आज भी निरंतर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मध्यप्रदेश की राजनीति, करंट अफेयर्स में विशेष रुचि है , साथ ही ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव है , यहाँ मध्यप्रदेश की हर छोटी बड़ी हलचल पर नज़र रहती है

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