📰 एडिटर डेस्क
रायसेन | जिला अस्पताल के मुख्य गेट पर देर रात हुई प्रसव की घटना ने स्वास्थ्य तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अमरावत निवासी 28 वर्षीय मुन्नी बाई ने शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात करीब 3:15 बजे अस्पताल के प्रवेश द्वार पर ही बच्ची को जन्म दिया।
घटना के बाद जब मामले ने तूल पकड़ा तो जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. यशपाल बाल्यान ने जननी एक्सप्रेस के वाहन चालक को दोषी ठहराते हुए बताया कि प्रसूता के अनुसार वह काफी देर से जननी एक्सप्रेस को कॉल कर रही थी, लेकिन वाहन समय पर नहीं पहुंचा। बाद में जब वाहन आया तो चालक महिला को अस्पताल के गेट पर ही छोड़कर चला गया, जबकि उसकी जिम्मेदारी महिला को अंदर शिफ्ट करना और पर्चा बनवाने की भी थी। फिलहाल जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ और सुरक्षित हैं।
लेकिन क्या पूरा मामला केवल एक ड्राइवर की लापरवाही तक सीमित है, या फिर सिस्टम की खामियां भी उतनी ही जिम्मेदार हैं—यह सवाल अब उठने लगा है।
इनका कहना…
“मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं और इसकी विस्तृत जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। यदि प्रथम दृष्टया किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
ऐसी घटनाएं अत्यंत गंभीर हैं और भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए आवश्यक व्यवस्थागत सुधार सुनिश्चित किए जाएंगे। जांच पूरी पारदर्शिता के साथ कराई जा रही है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्यवाही तय की जाएगी।”
अरुण विश्वकर्मा, कलेक्टर (जिला – रायसेन)
गेट पर छोड़कर चला गया वाहन
परिजनों के अनुसार, महिला को प्रसव पीड़ा होने पर जननी एक्सप्रेस से जिला अस्पताल लाया गया, लेकिन वाहन चालक उसे गेट पर ही उतारकर चला गया। उस समय महिला का पति अस्पताल के अंदर पर्चा बनवाने गया हुआ था। इसी दौरान प्रसव पीड़ा तेज हुई और महिला ने वहीं बच्ची को जन्म दे दिया।
कुछ ही मिनटों में अस्पताल स्टाफ मौके पर पहुंचा और जच्चा-बच्चा को अंदर भर्ती कराया गया। दोनों फिलहाल सुरक्षित बताए जा रहे हैं।
क्या सिर्फ ड्राइवर दोषी?
जिला अस्पताल के सिविल सर्जन ने प्राथमिक रूप से चालक की जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि प्रसूता को अंदर शिफ्ट करना और प्रक्रिया पूरी कराना उसकी ड्यूटी थी।
लेकिन सवाल यह भी है—
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क्या अस्पताल परिसर में रात के समय पर्याप्त स्टाफ मौजूद था?
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क्या आपातकालीन प्रसूति के लिए गेट पर कोई तैनाती या हेल्प डेस्क व्यवस्था है?
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अगर प्रसव की स्थिति गंभीर थी, तो क्या केवल चालक पर कार्रवाई से समस्या का समाधान होगा?
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क्या ऐसे आपातकालीन हालातों में भी पर्चा बनवाना प्राथमिकता होनी चाहिए?
स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े जानकारों का कहना है कि आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था एक टीम वर्क है। यदि किसी महिला को अस्पताल के मुख्य द्वार पर प्रसव करना पड़े, तो यह केवल एक व्यक्ति की चूक नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की संवेदनशीलता पर प्रश्न है।
जननी एक्सप्रेस की भूमिका पर भी सवाल
जननी एक्सप्रेस योजना का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को सुरक्षित प्रसव सुविधा तक पहुंचाना है। यदि वाहन समय पर न पहुंचे या मरीज को सुरक्षित वार्ड तक न ले जाया जाए, तो योजना की मूल भावना ही प्रभावित होती है।
परिजनों का दावा है कि वाहन बुलाने में भी देरी हुई थी। यदि यह तथ्य सही है, तो जांच का दायरा और व्यापक होना चाहिए।
जांच की मांग, जवाबदेही किसकी?
फिलहाल प्रशासन मामले की जांच की बात कह रहा है। लेकिन स्थानीय लोगों में चर्चा है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी चालक पर डालकर उच्च स्तर की जवाबदेही से बचने की कोशिश हो रही हो?
मां और बच्ची सुरक्षित हैं, यह राहत की बात है। परंतु यह घटना चेतावनी भी है—स्वास्थ्य सेवाओं में जवाबदेही तय होना जरूरी है, वरना अगली बार हालात किसी की जान ले सकते हैं।
सवाल अब भी कायम है—क्या यह केवल एक ड्राइवर की गलती थी, या व्यवस्था की कोई गहरी दरार सामने आई है?
इस पूरे घटनाक्रम ने कई कड़े सवाल खड़े कर दिए हैं—
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क्या जिला अस्पताल जैसे प्रमुख केंद्र में 24×7 इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम प्रभावी रूप से काम कर रहा है?
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क्या प्रसूता को गेट से वार्ड तक सुरक्षित पहुंचाने की स्पष्ट और मॉनिटर की जाने वाली प्रक्रिया मौजूद है?
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यदि जननी एक्सप्रेस पहुंची थी, तो अस्पताल स्टाफ को पूर्व सूचना क्यों नहीं मिली?
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क्या रात के समय पर्याप्त नर्सिंग स्टाफ और वार्ड बॉय तैनात थे?
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केवल एक चालक पर जिम्मेदारी तय कर देना क्या वास्तविक खामियों से ध्यान हटाने की कोशिश तो नहीं?
ऐसे मामलों में स्वतंत्र जांच, सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा और कॉल लॉग का विश्लेषण आवश्यक है, ताकि जवाबदेही स्पष्ट हो सके।
हमारा मानना है कि केवल इस एक घटना तक सीमित न रहकर जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में आपात प्रसूति प्रबंधन की समीक्षा की जानी चाहिए। मुख्य गेट पर 24 घंटे हेल्प डेस्क, स्ट्रेचर और प्रशिक्षित स्टाफ की अनिवार्य तैनाती, जननी एक्सप्रेस और अस्पताल के बीच रियल-टाइम समन्वय प्रणाली, तथा उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पूर्व सूचना प्रणाली लागू की जानी चाहिए। साथ ही, हर जिले में मॉक ड्रिल और नियमित ऑडिट से यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि आपात स्थिति में एक भी मिनट की देरी न हो। क्योंकि प्रसव जैसी स्थिति में चूक केवल प्रशासनिक त्रुटि नहीं, बल्कि जीवन से जुड़ा संवेदनशील विषय है।
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Author: PANKAJ JAIN
पत्रकारिता में 2009 से सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। "दैनिक अग्निबाण" में लंबी पारी के बाद "SCN NEWS" सहित कई संस्थानों में न्यूज़ डेस्क का नेतृत्व किया। वर्तमान में सा. "क्राइम अगेंस्ट न्यूज", दैनिक "तेजस रिपोर्टर" और कई डिजिटल प्लेटफार्म के संपादकीय प्रमुख हैं। सामाजिक सरोकारों, विशेषकर हाशिए पर खड़े वर्ग और अन्याय के मुद्दों पर लेखन में विशेष रुचि रखते हैं। इसके साथ ही "जिनोदय" और "पंकज का पंच" जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के निदेशक हैं, जो जनचेतना और वैचारिक संवाद को बढ़ावा देने का माध्यम हैं।







