MP में बच्चा चोरी की अफवाह का कहर : मंदसौर में बुजुर्ग से मारपीट, भोपाल में फेक वीडियो पर FIR, मंडीदीप में निर्दोष पिटा; रायसेन पुलिस ने जारी की चेतावनी

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📰 डिजिटल डेस्क
भोपाल/रायसेन | पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर बच्चा चोरी गैंग के सक्रिय होने की खबरों ने लोगों में दहशत का माहौल बना दिया है। पटना, कानपुर और दिल्ली के नाम पर वायरल हो रहे वीडियो और संदेशों के बाद मध्यप्रदेश के रायसेन और भोपाल जिलों में भी अफवाहें फैलने लगीं।
अभी कुछ देर पहले मंडीदीप की एक कॉलोनी में एक व्यक्ति को बच्चा चोर समझकर पीटने की सूचना मिली है। जानकारी के अनुसार, पिछले तीन दिनों से वह व्यक्ति कॉलोनी के बाहर दिखाई दे रहा था। संदेह होने पर सुरक्षा गार्ड ने उसे बैठाकर सोसाइटी प्रबंधन को सूचना दी। इसी दौरान कुछ लोगों ने उसे बच्चा चोर समझते हुए मारपीट शुरू कर दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और संबंधित व्यक्ति को अपने साथ थाने ले गई।

जांच-पड़ताल में पता चला कि उक्त व्यक्ति मानसिक रूप से विक्षिप्त है। मंडीदीप थाना प्रभारी रणजीत सराठे ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें। यदि कोई संदिग्ध व्यक्ति दिखाई दे, तो तत्काल पुलिस को सूचित करें और स्वयं कानून हाथ में न लें।
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पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अब तक किसी भी संगठित बच्चा चोरी गिरोह की पुष्टि नहीं हुई है। औद्योगिक शहर मंडीदीप ही नहीं, पूरे जिले में एक भी ऐसा प्रकरण दर्ज नहीं हुआ है।

बावजूद इसके अफवाहों का माहौल ऐसा बना हुआ है कि हर गली-मोहल्ले और चौक-चौराहे पर चर्चाओं में रोजाना दो-चार बच्चों के चोरी होने की बातें उड़ाई जा रही हैं। हकीकत और अफवाह के बीच का यह अंतर ही चिंता का विषय है, क्योंकि अपुष्ट चर्चाएं न केवल दहशत फैलाती हैं बल्कि निर्दोष लोगों के लिए भी खतरा बन सकती हैं।
इनका कहना…
“मंडीदीप में बच्चा चोरी से जुड़ा कोई भी मामला दर्ज नहीं हुआ है। लोग अफवाहों पर विश्वास न करें और किसी भी संदिग्ध स्थिति में तत्काल पुलिस को सूचना दें। कानून हाथ में लेने या किसी व्यक्ति के साथ मारपीट करने पर सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।”

“क्षेत्र में बच्चा चोरी की खबरें निराधार एवं अफवाह हैं। ऐसी कोई घटना दर्ज नहीं है। बिना सत्यापन के किसी भी संदेश या वीडियो पर विश्वास न करें और उसे साझा न करें। किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत पुलिस को सूचना दें।”
“जिले में बच्चा चोरी की कोई घटना दर्ज नहीं हुई है। अफ़वाहों पर ध्यान न दें । नागरिक अपुष्ट जानकारी साझा न करें और कानून हाथ में लेने से बचें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल नजदीकी थाना या कंट्रोल रूम को दें।”

भोपाल में फर्जी वीडियो पर कार्रवाई

भोपाल पुलिस ने छह वर्ष पुराने एक वीडियो को हालिया घटना बताकर वायरल करने वाले अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यह वीडियो उत्तर प्रदेश के जालौन जिले का बताया जा रहा है, जिसे भ्रामक तरीके से शेयर कर शहर में भय फैलाने की कोशिश की गई। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी वीडियो या पोस्ट को साझा करने से पहले उसकी सत्यता जांच लें।

अफवाहों ने लिया हिंसक रूप

देश के अन्य हिस्सों में ऐसी अफवाहें खतरनाक साबित हुई हैं। झारखंड के रांची और चतरा में बच्चा चोरी के संदेह में निर्दोष लोगों को भीड़ ने पीटा, एक मामले में व्यक्ति की मौत तक हो गई। मध्यप्रदेश के मंदसौर में भी एक मानसिक रूप से अस्थिर बुजुर्ग को बच्चा चोर समझकर रस्सी से बांधकर बेरहमी से पीटा गया। बाद में जांच में वह निर्दोष निकला।

पिछले पांच दिनों में झारखंड के कई जिलों में 12 से अधिक मारपीट की घटनाएं सामने आई हैं। ये उदाहरण बताते हैं कि बिना पुष्टि की गई खबरें किस तरह भीड़ को उकसा सकती हैं और निर्दोष लोग मॉब लिंचिंग का शिकार बन सकते हैं।

रायसेन और भोपाल में पुलिस सतर्क

रायसेन और भोपाल पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में ऐसी किसी गैंग की आधिकारिक पुष्टि नहीं है। फिर भी एहतियात के तौर पर स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और अभिभावकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। पुलिस ने कहा है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत कंट्रोल रूम या नजदीकी थाने में दें, स्वयं कार्रवाई न करें।

बचने के लिए क्या करें

बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए सतर्कता और सही जागरूकता बेहद जरूरी है। अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने छोटे बच्चों को कभी भी अकेले बाहर न भेजें और स्कूल या आंगनवाड़ी आने-जाने के लिए हमेशा तय व्यक्ति ही साथ जाए। बच्चों को समझाएं कि वे किसी भी अनजान महिला या पुरुष से बात न करें, उनसे कोई चीज न लें और अगर कोई जबरदस्ती साथ ले जाने की कोशिश करे तो तुरंत जोर से शोर मचाएं और आसपास के लोगों से मदद मांगें। साथ ही बच्चों को माता-पिता और पुलिस का मोबाइल नंबर याद करवाने के साथ ही उनकी जेब में नाम-पता लिखी पर्ची रखना भी जरूरी है। इसके अलावा मुसीबत में मदद मांगने हेतु शारीरिक संकेत देने का भी प्रशिक्षण दें।

बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी सावधानियां

  • छोटे बच्चों को कभी अकेला बाहर न भेजें।
  • स्कूल या आंगनवाड़ी आने-जाने के लिए विश्वसनीय व्यक्ति ही साथ जाए।
  • बच्चों को सिखाएं कि वे किसी भी अजनबी से बात न करें, कोई वस्तु न लें या उनके साथ न जाएं।
  • खतरे की स्थिति में जोर से शोर मचाने और मदद मांगने का अभ्यास कराएं।
  • बच्चों को माता-पिता और पुलिस हेल्पलाइन नंबर याद करवाएं।
  • सोशल मीडिया पर फैली अपुष्ट जानकारी साझा करने से बचें।

अफवाहों से बचें, जिम्मेदारी निभाएं

विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर तेजी से फैलती अपुष्ट सूचनाएं सामाजिक तनाव और हिंसा को जन्म दे सकती हैं। एक गलत संदेश सैकड़ों लोगों को भड़का सकता है। इसलिए हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह संयम और विवेक से काम ले।

बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, लेकिन सुरक्षा के नाम पर अफवाहों को हवा देना और कानून हाथ में लेना समाज को और असुरक्षित बना सकता है। रायसेन और भोपाल में फिलहाल ऐसे कोई मामले नहीं है, पर जागरूकता और जिम्मेदारी दोनों जरूरी हैं।

सवाल यह है—क्या हम अफवाहों के शिकार बनेंगे, या सतर्क और समझदार नागरिक बनकर समाज को सुरक्षित रखेंगे?

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PANKAJ JAIN
Author: PANKAJ JAIN

पत्रकारिता में 2009 से सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। "दैनिक अग्निबाण" में लंबी पारी के बाद "SCN NEWS" सहित कई संस्थानों में न्यूज़ डेस्क का नेतृत्व किया। वर्तमान में सा. "क्राइम अगेंस्ट न्यूज", दैनिक "तेजस रिपोर्टर" और कई डिजिटल प्लेटफार्म के संपादकीय प्रमुख हैं। सामाजिक सरोकारों, विशेषकर हाशिए पर खड़े वर्ग और अन्याय के मुद्दों पर लेखन में विशेष रुचि रखते हैं। इसके साथ ही "जिनोदय" और "पंकज का पंच" जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के निदेशक हैं, जो जनचेतना और वैचारिक संवाद को बढ़ावा देने का माध्यम हैं।

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