रिपोर्ट:आजम लाला
भोपाल मप्र | हाउसिंग बोर्ड की जमीन पर अवैध कब्जे का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां कागज़ों में 20×60 (1200 वर्गफीट) की रजिस्ट्री है, लेकिन मौके पर 40×60 (2400 वर्गफीट) में निर्माण खड़ा कर दिया गया। इतना ही नहीं, सरकारी नाले की जमीन पर भी अतिक्रमण कर पक्का मकान बना लिया गया, जिससे हर बरसात में क्षेत्र में जलभराव और बाढ़ जैसे हालात बन रहे हैं।

मामला वार्ड 78, जोन 17 का बताया जा रहा है। एमआईजी-473 प्लॉट शहनाज खान पत्नी फाजिल मोहम्मद उर्फ बबलू मस्तान के नाम 20×60 (1200 वर्गफीट) दर्ज है। इसके बगल में प्लॉट 474 (15×20 = 600 वर्गफीट) किसी अन्य व्यक्ति के नाम बताया जा रहा है। वहीं दोनों प्लॉट के पास लगभग 8×20 फीट जमीन नाले के लिए छोड़ी गई थी, जहां से करीब 12 कॉलोनियों का पानी निकास होता है।

आरोप है कि 1200 वर्गफीट की रजिस्ट्री के बावजूद 2400 वर्गफीट में निर्माण कर लिया गया और नाले की जमीन तक को पाटकर कब्जा कर लिया गया। नतीजा—हर बारिश में नाले का पानी उफान पर आकर सड़कों और घरों में घुस जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जलनिकासी बाधित होने से हालात बाढ़ जैसे बन जाते हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि कथित अतिक्रमणकर्ता खुलेआम कह रहा है—“पैसा हो तो कहीं भी कब्जा करो, कोई रोक नहीं सकता।” इस बयान ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हाउसिंग बोर्ड के अधिकारी का कहना है कि प्लॉट 474 फाजिल मोहम्मद या शहनाज के नाम रजिस्टर्ड नहीं है और मकान निर्माण की अनुमति भी नहीं दी गई। उन्होंने जांच और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
वहीं वार्ड 78, जोन 17 के प्रभारी अभिषेक के अनुसार नोटिस जारी कर दिया गया है। यदि नाले या अतिरिक्त जमीन पर अतिक्रमण पाया गया तो जल्द हटाने की कार्रवाई की जाएगी। जांच शुरू होने की बात कही गई है।
स्थानीय रहवासियों का कहना है कि बरसात के दौरान पानी की निकासी बाधित होने से बाढ़ जैसे हालात बनते हैं और हजारों लोग प्रभावित होते हैं। आरोप है कि हाउसिंग बोर्ड और नगर निगम की अनदेखी ही इस समस्या की जड़ है। लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतों के बावजूद न तो मौके पर सीमांकन कराया गया और न ही नाले की साफ-सफाई या चौड़ीकरण की कोई ठोस कार्रवाई की गई।
इस पूरे मामले में अब मांग उठ रही है कि—
बी-474 प्लॉट और उससे लगी नाले की जमीन की निष्पक्ष जांच हो। नाले की शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए। बिना अनुमति किए गए निर्माण पर सख्त कार्रवाई हो।

समाजसेवी आजम लाला ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे कलेक्टर एवं मुख्यमंत्री मोहन यादव को इस स्थिति से अवगत कराएंगे।
अब बड़ा सवाल यह है कि—क्या हाउसिंग बोर्ड के प्लाट संपत्ति पर कब्जा करने वालों का “साम्राज्य” यूं ही चलता रहेगा?क्या भ्रष्ट तंत्र जांच को प्रभावित करेगा?क्या राजनीतिक रसूख के दम पर कार्रवाई टलती रहेगी?या फिर प्रशासन सख्त कदम उठाकर नाले और सरकारी जमीन को मुक्त कराएगा?

तेजस रिपोर्टर इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार पैनी नजर बनाए हुए है। इलाके की जनता की उम्मीद अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है। देखना होगा कि अवैध अतिक्रमण पर बुलडोज़र चलता है या फिर मामला फाइलों में ही सिमट कर रह जाता है।
Author: SURAJ MEHRA
साल 2022 से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत "सूरज मेहरा" आज भी निरंतर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मध्यप्रदेश की राजनीति, करंट अफेयर्स में विशेष रुचि है , साथ ही ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव है , यहाँ मध्यप्रदेश की हर छोटी बड़ी हलचल पर नज़र रहती है






