तपोभूमि खनियांधाना में उतरी दिव्यता: पंचकल्याणक महोत्सव में उमड़ा आस्था का महासागर

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रिपोर्ट – अतुल कुमार जैन
खनियांधाना | बुंदेलखंड की पावन धरा खनियांधाना इन दिनों भक्ति, तप और ज्ञान की अद्भुत आभा से आलोकित है। नगर में आयोजित पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं त्रयगजरथ महोत्सव ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक चेतना के केंद्र में परिवर्तित कर दिया है। विशाल पंडाल में उमड़े श्रद्धालुओं के जयघोष, मुनिसंघ की पावन उपस्थिति और भव्य मंचन ने वातावरण को मानो दिव्य लोक में बदल दिया।
ज्ञान कल्याणक: तप की पराकाष्ठा और प्रथम आहार का ऐतिहासिक क्षण
महोत्सव के अंतर्गत ज्ञान कल्याणक का भव्य एवं भावविभोर कर देने वाला मंचन किया गया। जैन परंपरा के अनुसार दीर्घकालीन कठोर तपस्या के पश्चात प्रभु जब आहार हेतु निकले, तब राजा श्रेयांश और राजा सोम को प्रथम आहार अर्पित करने का अनुपम सौभाग्य प्राप्त हुआ। इक्षुरस से पारणा का दृश्य जैसे ही प्रस्तुत हुआ, पूरा पंडाल “आदिनाथ भगवान की जय” के गगनभेदी नारों से गूंज उठा।
जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के जीवन प्रसंगों का सजीव चित्रण श्रद्धालुओं के लिए दान, संयम और श्रावक धर्म की सर्वोच्च परंपरा का प्रेरक संदेश बन गया। अनेक श्रद्धालुओं की आंखें श्रद्धा से नम हो उठीं।
केवलज्ञान और समवशरण: अलौकिक छटा में डूबा नगर
आहार के पश्चात प्रभु को केवलज्ञान की प्राप्ति का अत्यंत मनोहारी और प्रभावशाली मंचन किया गया। देवों द्वारा रचित समवशरण की भव्य झांकी ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं देवगण धरती पर अवतरित होकर प्रभु की वंदना कर रहे हों।
इस अवसर पर पधारे मुनि पुंगव 108 श्री सुधासागर जी महाराज ने अपनी ओजस्वी देशना में कहा कि जब आत्मा मोह, माया और अज्ञान के अंधकार से मुक्त होकर अनंत ज्ञान में प्रतिष्ठित होती है, तभी सच्चे कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने अहिंसा, अपरिग्रह, संयम और आत्मशुद्धि को जीवन का आधार बनाने का संदेश दिया। उनकी अमृतवाणी ने हजारों श्रद्धालुओं को आत्ममंथन के लिए प्रेरित कर दिया।
मोक्ष कल्याणक और त्रयगजरथ: भव्य शोभायात्रा की तैयारी
रविवार को महोत्सव का समापन ‘मोक्ष कल्याणक’ के पावन आयोजन के साथ होगा। प्रभु के सिद्धपद प्राप्ति का भावपूर्ण मंचन श्रद्धालुओं को वैराग्य और मोक्षमार्ग की प्रेरणा देगा। इसके पश्चात त्रयगजरथ फेरी निकाली जाएगी, जिसमें सुसज्जित तीन भव्य रथों पर प्रभु की प्रतिमाएं विराजमान होकर नगर भ्रमण करेंगी। बैंड-बाजों, धर्मध्वजाओं और मंगल घोषों के साथ निकलने वाली यह शोभायात्रा खनियांधाना की सड़कों को भक्तिरस से आप्लावित कर देगी।
सेवा, व्यवस्था और श्रद्धा का संगम
महोत्सव समिति द्वारा बाहर से आए हजारों श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, चिकित्सा, आवास और सुरक्षा की व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। भगवान के मोक्ष कल्याणक की पावन स्मृति में विशाल स्तर पर मिष्ठान वितरण भी किया जाएगा। आयोजन समिति का अनुमान है कि समापन अवसर पर जनसैलाब उमड़ेगा और नगर का प्रत्येक कोना आस्था के रंग में रंग जाएगा।
पूरे आयोजन को प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया सुयश (अशोकनगर) के निर्देशन में शास्त्रोक्त विधि-विधान और परंपरागत मर्यादाओं के अनुरूप संपन्न कराया जा रहा है। मीडिया प्रभारी संजीव जैन चौधरी एवं सहसंयोजक प्रवीण जैन के अनुसार खनियांधाना आज सचमुच एक जीवंत तीर्थ के रूप में प्रतिष्ठित हो उठा है, जहां हर आगंतुक श्रद्धालु आत्मिक शांति, नवऊर्जा और आध्यात्मिक अनुभूति लेकर लौट रहा

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Raju Atulkar
Author: Raju Atulkar

"पत्रकारिता सिर्फ पेशा नहीं, जिम्मेदारी भी है…" साल 2015 से कलम की स्याही से सच को उजागर करने की यात्रा जारी है। समसामयिक मुद्दों की बारीकियों को शब्दों में ढालते हुए समाज का आईना बनने की कोशिश। — राजू अतुलकर, तेजस रिपोर्टर डिजिटल

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