स्थानीय संवाददाता
भोपाल मप्र | राजधानी के भोपाल में एक ऐसा पारिवारिक विवाद सामने आया है, जिसने खून के रिश्तों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। मामला इंद्रा आश्रय कॉलोनी, करोंद स्थित बी-471 हाउसिंग बोर्ड मकान का है, जो निशातपुरा थाना क्षेत्र में आता है।
2014 में बहन के दस्तावेज़ पर फाइनेंस, 12 साल तक भाई भरता रहा किस्त
परिवार के अनुसार, वर्ष 2014 में शहनाज के पिता ने करोंद हाउसिंग बोर्ड में एक मकान खरीदा। बैंक फाइनेंस के लिए दस्तावेज़ बेटी के नाम से लगाए गए। आरोप है कि दामाद फाजिल मोहम्मद ने ससुर और साले को भरोसा दिलाकर अपनी पत्नी के कागजों पर मकान फाइनेंस करवा दिया। आरोप के मुताबिक, परिवार और मोहल्ले के लोगों का कहना है कि किस्तें लगातार इम्तियाज खान भरता रहा। सब कुछ सामान्य चलता रहा, लेकिन जैसे ही लोन की कुछ साल की किस्त बाकी रह गई, हालात पलट गए।

“मकान हमारा, तुम किराएदार” – 5 लाख की मांग
भाई इम्तियाज के मुताबिक, पहले 50 हजार रुपये लिए गए। इसके बाद रकम की मांग बढ़ती गई आरोप है कि बहन और बहनोई फाजिल मोहम्मद ने अब मकान पर मालिकाना हक जताते हुए 5 लाख रुपये की मांग कर दी और लगातार पैसों का दबाब बनाया जा रहा है कथित तौर पर कहा गया कि “मकान हमारे नाम है, कोर्ट में कुछ साबित नहीं कर पाओगे, एसडीएम कार्रवाई कराकर बाहर निकलवा देंगे।”

हथियारों के साथ पहुंचने का आरोप
परिवार का आरोप है कि शहनाज और फाजिल अपने बच्चों व अन्य लोगों के साथ घर पहुंचे और मारपीट व धमकी दी। तलवार और बंदूक जैसे हथियार लाने का भी आरोप लगाया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विवाद इतना बढ़ गया कि बेटी और जमाई अपने ही पिता-भाई को घर से बेदखल करने पर आमादा दिखे। घटना के बाद मामला थाने तक पहुंचा और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

रिश्ते बनाम रजिस्ट्री
यह सिर्फ संपत्ति का झगड़ा नहीं, बल्कि भरोसे के टूटने की कहानी भी है। एक भाई ने बहन पर यकीन कर दस्तावेज़ उसके नाम पर रखे, 12 साल तक किस्त चुकाई, और अब उसी घर में अपने हक के लिए जूझ रहा है। अब निगाहें पुलिस जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं। लेकिन सवाल वही है—
क्या कुछ लाख रुपयों के लिए खून का रिश्ता भी इतना हल्का पड़ सकता है?
रिश्तों पर सवाल
यह घटना केवल संपत्ति विवाद नहीं, बल्कि रिश्तों के टूटने की कहानी भी है। एक भाई ने अपनी बहन पर भरोसा कर दस्तावेज़ उसके नाम पर कराए, लेकिन अब वही भरोसा उसके लिए मुसीबत बन गया।
धर्म और हक की चर्चा के बीच उठते सवाल
अक्सर यह कहा जाता है कि इस्लाम में बेटियों को संपत्ति में हिस्सा दिया जाता है। लेकिन यहां विवाद इस बात का है कि क्या दस्तावेज़ी नाम का सहारा लेकर परिवार के अन्य सदस्यों के अधिकारों को नजरअंदाज किया जा सकता है?
Author: SURAJ MEHRA
साल 2022 से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत "सूरज मेहरा" आज भी निरंतर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मध्यप्रदेश की राजनीति, करंट अफेयर्स में विशेष रुचि है , साथ ही ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव है , यहाँ मध्यप्रदेश की हर छोटी बड़ी हलचल पर नज़र रहती है






