खनियांधाना में उमड़ा जनसैलाब : पंचकल्याणक के तीसरे दिन बालक तीर्थंकर जन्मोत्सव में रत्नवृष्टि और 1008 कलशों से महाभिषेक

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📰 अतुल कुमार जैन
खनियांधाना | बुंदेलखंड की पावन धरती खनियांधाना इन दिनों पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं त्रयगजरथ महोत्सव की दिव्य छटा से आलोकित है। महोत्सव के तीसरे दिन बालक तीर्थंकर जन्म प्रसंग ने ऐसा आध्यात्मिक वातावरण रचा, जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।

जैसे ही बालक तीर्थंकर के जन्म के उपरांत नगर एवं ग्रामीण अंचल के लिए भव्य शोभायात्रा निकली, पूरा क्षेत्र “जय-जिनेन्द्र” के घोष से गुंजायमान हो उठा। सजे-धजे रथ, आकर्षक झांकियां और भक्तिमय वातावरण ने इसे ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान कर दिया।

रत्नवृष्टि से अलौकिक बना दृश्य

जुलूस के दौरान वह क्षण अत्यंत भावपूर्ण हो उठा, जब कुबेर इंद्र द्वारा नगर में रत्नों की प्रतीकात्मक वर्षा की गई। श्रद्धालुओं ने इसे दैवी अनुग्रह का प्रतीक मानकर उत्साह से स्वागत किया।
नगर के विभिन्न स्थानों पर मिठाइयां बांटी गईं, जिससे जन्मोत्सव की खुशी जन-जन तक पहुंची। बालक तीर्थंकर के स्वागत में सड़कों पर उमड़ी भीड़ ने इस आध्यात्मिक पर्व को जनोत्सव का रूप दे दिया।

पाण्डुक शिला पर 1008 कलशों से महा-जलाभिषेक

शोभायात्रा पुनः ‘अयोध्या नगरी’ (महोत्सव पांडाल) पहुंची, जहां पाण्डुक शिला पर सौधर्म इंद्र और कुबेर इंद्र सहित समस्त इंद्रों द्वारा 1008 कलशों से मंगल जलाभिषेक संपन्न हुआ।

यह दृश्य भक्ति, अनुशासन और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्वितीय संगम था। श्रद्धालु मंत्रोच्चार के बीच इस दिव्य क्षण के साक्षी बने।

सुबह 7:20 बजे हुई जन्म की मंगल घोषणा

इससे पूर्व शुक्रवार की प्रातःकालीन बेला में मुनि पुंगव 108 श्री सुधासागर जी महाराज एवं मुनि 108 श्री निरापद सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से ठीक सुबह 7:20 बजे बालक तीर्थंकर के जन्म की घोषणा की गई।

जैसे ही यह शुभ समाचार पांडाल में पहुंचा, वातावरण उल्लास और भावविभोर जयकारों से भर गया। श्रद्धालुओं ने इसे युगों-युगों का पुण्य क्षण बताया।

महाराजा नाभिराय का सजा दिव्य राजदरबार

बालक तीर्थंकर के जन्म उपरांत महाराजा नाभिराय का राजदरबार वैभव और आध्यात्मिक आभा से सुसज्जित किया गया। महाराजा नाभिराय और माता मरुदेवी के आंगन में प्रभु के अवतरण के उपलक्ष्य में सौधर्म इंद्र अपनी देवसभा के साथ पधारे।
देवराज इंद्र ने महाराजा नाभिराय को बधाई दी और बालक तीर्थंकर के दर्शन कर श्रद्धा प्रकट की। यह पूरा दृश्य आध्यात्मिक नाट्य रूपांतरण के माध्यम से प्रस्तुत किया गया, जिसने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

भजनों पर झूम उठा पांडाल

उत्सव के दौरान सुप्रसिद्ध संगीतकार सत्येंद्र शर्मा एंड पार्टी ने जन्म बधाई के मधुर भजनों की प्रस्तुति दी। जैसे ही संगीत की स्वर लहरियां गूंजीं, हजारों श्रद्धालु भक्ति में डूबकर नृत्य करने लगे।
आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का यह संगम खनियांधाना की स्मृतियों में लंबे समय तक अंकित रहेगा।

विधि-विधान से संपन्न हो रहीं क्रियाएं

प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी प्रदीप भैया सुयश (अशोकनगर) के निर्देशन में सभी मांगलिक अनुष्ठान शास्त्रोक्त विधि से संपन्न किए जा रहे हैं।

मीडिया प्रभारी संजीव जैन चौधरी और सहसंयोजक प्रवीण जैन ने बताया कि जन्मोत्सव, रत्नवृष्टि, मिठाई वितरण और महाभिषेक जैसे प्रसंगों ने खनियांधाना को आध्यात्मिक आनंद से सराबोर कर दिया है।

 

पंचकल्याणक महोत्सव केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और सामूहिक चेतना का जीवंत उत्सव है।
खनियांधाना में उमड़ा यह श्रद्धा-सैलाब यह संदेश देता है कि जब धर्म और संस्कृति एक साथ स्पंदित होते हैं, तब समाज केवल उत्सव नहीं मनाता—वह अपनी जड़ों से पुनः जुड़ता है।
प्रश्न यह है कि क्या हम इस आध्यात्मिक ऊर्जा को अपने जीवन में भी उतार पाएंगे? यही इस महोत्सव की सबसे बड़ी सार्थकता है।

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