नर्मदापुरम के गुरंजघाट छात्रावास में बदहाली की इंतहा, गुटखा-थूक से सना भवन, भूखे-ठिठुरते आदिवासी छात्र,अधीक्षक दुर्गा प्रसाद गौर बेपरवाह

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विशेष संवाददाता : मध्यप्रदेश
नर्मदापुरम। मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले के सिवनी मालवा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम गुरंजघाट स्थित शासकीय जनजातीय सीनियर बालक छात्रावास में ऐसी भयावह अनियमितताएं सामने आई हैं, जिन्हें देखकर किसी का भी दिल दहल जाए। जब दैनिक तेजस रिपोर्टर टीम ने छात्रावास का जायजा लिया तो हकीकत देख होश उड़ गए। भवन के अंदर कदम रखते ही हर तरफ तंबाकू के पाउच, गुटखा थूक और गंदगी का साम्राज्य नजर आया। दीवारें, फर्श, गलियारे — हर जगह पान-मसाले के छींटे पड़े थे।

शौचालय बदबू का अड्डा बने

अगर शौचालय की बात करें तो हालात और भी शर्मनाक हैं। इतनी गंदगी और बदबू कि पास खड़ा होना तक मुश्किल। मजबूर छात्र इसी माहौल में दिन काट रहे हैं।

न खाना ढंग का, न ओढ़ने को कंबल

छात्र पहले डर के मारे कुछ बोलने को तैयार नहीं थे, लेकिन जब भरोसा दिलाया गया तो उन्होंने खुलकर बताया कि —
न हमें ढंग का खाना मिलता है,
न सर्दी में ओढ़ने को पर्याप्त कंबल,
न मेनू के अनुसार भोजन।
छात्रों का आरोप है कि रोज़ एक ही तरह का घटिया भोजन दिया जाता है, जो पेट भरने के लायक भी नहीं होता।

 

मंत्री के आदेश हवा में, अधीक्षक गायब

मोहन सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने पर जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि छात्रावास अधीक्षक को बच्चों के साथ रात भी रुकना होगा, लापरवाही पर कार्रवाई होगी।
लेकिन गुरंजघाट छात्रावास में स्थिति उलट है। छात्रों का कहना है — “रात रुकना तो दूर, हमारे अधीक्षक दुर्गा प्रसाद गौर दिन में भी मुश्किल से मिलते हैं।”
जब भी निरीक्षण हुआ, अधीक्षक मौके पर नहीं मिले। फोन पर बात करने पर कहते हैं — “आपको जो दिखे वो लिखो।”

कर्मचारी की 4 महीने से तनख्वाह बंद

छात्रावास में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी सफाई कर्मचारी ने बताया कि उसकी पिछले चार महीने से सैलरी नहीं आई। शिकायत करने पर अधीक्षक गंभीरता से नहीं लेते और कहते हैं कि अभी आबंटन नहीं हुआ।

मनोरंजन के नाम पर सिर्फ शोपीस टीवी

छात्रों ने बताया कि मनोरंजन के लिए टीवी तो है, लेकिन सालों से खराब पड़ा है। कई बार कहने के बावजूद अधीक्षक ने उसे ठीक नहीं कराया।

एक साल पहले भी खुल चुकी थी पोल

गौर करने वाली बात यह है कि एक साल पहले भी दैनिक तेजस की टीम ने छात्रावास की अनियमितताओं को उजागर किया था, अधिकारियों को अवगत कराया गया था, लेकिन आज तक हालात जस के तस बने हुए हैं।

सवाल सिर्फ अधीक्षक पर नहीं, पूरे सिस्टम पर

सवाल केवल अधीक्षक का नहीं है। क्या ऊपर बैठे अधिकारी सिर्फ एसी केबिन में बैठकर आदेश जारी कर रहे हैं? क्या ज़मीनी हकीकत देखने की जिम्मेदारी किसी की नहीं?
क्या मंत्री की योजनाओं को अधिकारी खुद ही पलीता लगा रहे हैं? नर्मदापुरम जनजातीय विभाग के सहायक आयुक्त को यह गंभीर स्थिति नजर क्यों नहीं आती? या जानबूझकर अनदेखी की जा रही है?

बड़ी घटना का इंतजार क्यों?

इंदौर के भागीरथपुरा में प्रदूषित पानी से 25 मौतें, खंडवा में छात्रावास के खाने में 3 इंच लंबी इल्लियां, जबलपुर के हरदुली छात्रावास में दूषित भोजन से छात्र की मौत —
इतनी घटनाओं के बाद भी जनजातीय विभाग क्यों नहीं जाग रहा? क्या अधिकारी किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं?

आदिवासी छात्रों के साथ इतनी बेरहमी क्यों?

आदिवासी समुदाय के बच्चों के भविष्य के साथ यह खुला खिलवाड़ क्यों? सरकार की योजनाएं कागजों में ही क्यों सिमट जाती हैं?
अब सवाल यह है कि क्या गुरंजघाट छात्रावास की बदहाली पर शासन-प्रशासन जागेगा या फिर किसी हादसे के बाद ही कुंभकर्णी नींद टूटेगी?
SURAJ MEHRA
Author: SURAJ MEHRA

साल 2022 से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत "सूरज मेहरा" आज भी निरंतर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मध्यप्रदेश की राजनीति, करंट अफेयर्स में विशेष रुचि है , साथ ही ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव है , यहाँ मध्यप्रदेश की हर छोटी बड़ी हलचल पर नज़र रहती है

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