📰 अतुल कुमार जैन
शिवपुरी | परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया के निर्देशन में तीर्थोदय तीर्थ गोलाकोट में आयोजित श्री मद् जिनेन्द्र पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ (गजरथ महोत्सव) भक्ति, वैराग्य और जनकल्याण का जीवंत संगम बन गया। शुक्रवार प्रातःकाल से ही अयोध्या नगरी की ओर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने आयोजन को दिव्य उल्लास से भर दिया।
महाशांति धारा के महापुण्यशाली
जगत-कल्याण की कामना के साथ महाशांति धारा का आयोजन हुआ। इस क्रम में सौधर्म इन्द्र की भूमिका में राकेश वास्तु, कुबेर इन्द्र के रूप में पीयूष जैन (दिल्ली) तथा महायज्ञ नायक सतेन्द्र जैन (राजधानी, दिल्ली) की भूमिका उल्लेखनीय रही।
गोलाकोट पहुंचे कई प्रशासनिक अधिकारी
इस दौरान शिवपुरी कलेक्टर रविन्द्र सिंह चौधरी, एसपी अमन सिंह राठौर, पूर्व कलेक्टर आर.के. जैन, एसडीओपी पिछोर प्रशांत शर्मा तथा एसडीएम ममता शाक्य तीर्थोदय गोलाकोट पहुंचे और मुनिश्री का आशीर्वाद प्राप्त किया। कलेक्टर चौधरी ने समिति के जनकल्याणकारी कार्यों की सराहना करते हुए शासन-सहयोग से पिछोर में 100-बिस्तरीय अस्पताल निर्माण की बात कही।

देशना का सार : मन–वचन–कर्म की शुद्धि
मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने जीवन-दर्शन को संक्षिप्त, स्पष्ट और प्रेरक शब्दों में रखा—
“मेरा मन अच्छा हो, वचन अच्छा हो और कर्म भी अच्छे होना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि संसार में दो प्रवृत्तियाँ साथ-साथ चलती हैं—एक जो जीवन को आनंदमय बनाती है और दूसरी जो स्वयं की नकारात्मकता से सब कुछ धुंधला कर देती है।
“अच्छा आदमी सारे जगत को अच्छा दिखेगा। वह ध्रुव तारे की तरह चमकता है—उस पर ग्रहण नहीं लगता।”
मुनिश्री ने आगे सहयोग का संदेश देते हुए कहा कि सच्ची उन्नति तब होती है, जब व्यक्ति अपनी भलाई को परिवार, समाज और राष्ट्र के मंगल से जोड़ता है।
राग से वैराग्य की महागाथा
देशना का केन्द्रीय भाव रहा—राजा ऋषभदेव का राजपाट त्याग। मुनिश्री ने कहा—
“तीर्थंकर प्रभु ने राजपाठ छोड़कर राग से वैराग्य की ओर कदम बढ़ाए।”

उन्होंने समझाया कि तीर्थंकरों का जीवन सामान्य नहीं होता। नियोगी काल, देव-व्यवस्था, नीलांजना नृत्य और सौधर्म इन्द्र की भूमिका—ये सब वैराग्य के उदय को सहज बनाते हैं।
“सगुन सब जगह होता है; तीर्थंकर का नियोग स्वयं सारी व्यवस्था करता है।”
यह प्रसंग केवल इतिहास नहीं, बल्कि आज के समय के लिए भी दिशा-सूचक है—जब भोग के बीच वैराग्य का विवेक जागे।
ज्ञान कल्याणक और द्रव्य-भेंट
जैन समाज अशोकनगर के मंत्री विजय धुर्रा ने बताया कि आगामी दिवस ज्ञान कल्याणक के रूप में मनाया जाएगा, जिसमें मुनिराज की आहारचर्या का दुर्लभ सौभाग्य प्राप्त होगा।

अशोकनगर जैन समाज ने अध्यक्ष राकेश कांसल एवं महामंत्री राकेश अमरोद के नेतृत्व में पंच कल्याणक हेतु द्रव्य-भेंट अर्पित की। मंगलाष्टक, महापूजन और दीप प्रज्ज्वलन के साथ समाज की सामूहिक सहभागिता ने आयोजन को व्यापक आधार दिया।
रात्रि कालीन आयोजन
तीर्थोदय तीर्थ गोलाकोट में रात्रि कालीन आयोजन श्रद्धा, भाव और आध्यात्मिक आनंद का विशेष केंद्र बना। सायंकालीन आरती के पश्चात भगवान की बाल-क्रीड़ा का अत्यंत मनोहारी मंचन प्रस्तुत किया गया, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। मंचन में भगवान के शैशव काल की लीलाओं को संगीत, नृत्य और संवादों के माध्यम से सजीव रूप में उकेरा गया, जिससे पूरा पंडाल भक्ति-रस में डूब गया।

इसके उपरांत भगवान का पालना-झुलन का पावन अवसर आया। श्रद्धा और उल्लास के साथ भक्तों ने पालना झुलाकर प्रभु के प्रति अपने भाव समर्पित किए। दीपों की ज्योति, भक्ति-गीतों की मधुर ध्वनि और जयघोषों के बीच यह क्षण विशेष रूप से स्मरणीय बन गया। रात्रि कार्यक्रम में तीर्थ क्षेत्र समिति द्वारा अतिथियों का अभिनंदन भी किया गया, जिससे आयोजन को सामाजिक गरिमा और सौहार्द का स्वरूप मिला।
समूचा रात्रि कालीन आयोजन यह संदेश छोड़ गया कि भक्ति केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि भावों का उत्सव है—जहां हर हृदय प्रभु से जुड़कर आनंद और शांति का अनुभव करता है।
गोलाकोट का यह पंच कल्याणक महोत्सव केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि वैराग्य, सहयोग और जनकल्याण का जीवंत पाठ है। राजा ऋषभदेव का राजत्याग आज भी पूछता है—
क्या हम अपने मन, वचन और कर्म को इतना शुद्ध रख पा रहे हैं कि समाज स्वतः मंगलमय बन जाए?
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Author: PANKAJ JAIN
पत्रकारिता में 2009 से सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। "दैनिक अग्निबाण" में लंबी पारी के बाद "SCN NEWS" सहित कई संस्थानों में न्यूज़ डेस्क का नेतृत्व किया। वर्तमान में सा. "क्राइम अगेंस्ट न्यूज", दैनिक "तेजस रिपोर्टर" और कई डिजिटल प्लेटफार्म के संपादकीय प्रमुख हैं। सामाजिक सरोकारों, विशेषकर हाशिए पर खड़े वर्ग और अन्याय के मुद्दों पर लेखन में विशेष रुचि रखते हैं। इसके साथ ही "जिनोदय" और "पंकज का पंच" जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के निदेशक हैं, जो जनचेतना और वैचारिक संवाद को बढ़ावा देने का माध्यम हैं।







