“क्रिया तभी धर्म बनती है, जब उसमें आनंद हो” — मुनि पुगंव सुधासागरजी की देशना से गूंजा तीर्थोदय गोलाकोट

SHARE:

📰 अतुल कुमार जैन
खनियांधाना | अतिप्राचीन एवं अतिशयकारी तीर्थोदय तीर्थ गोलाकोट में चल रहे श्री मद् जिनेन्द्र पंचकल्याणक महामहोत्सव के अंतर्गत तप कल्याणक की पावन बेला आध्यात्मिक चेतना और गहन आत्मबोध का सशक्त केंद्र बनती जा रही है। परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज की देशना ने श्रद्धालुओं को यह समझाया कि धर्म केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि आनंद से उपजा पुण्य है।

मुनिश्री ने अपने ओजस्वी प्रवचन में कहा—
सिर्फ क्रिया में धर्म नहीं है। क्रिया में जब आनंद आता है, तभी वह पुण्य में बदलती है।
उन्होंने भक्तों को भाग्यवान मानते हुए कहा कि जब पुण्य का उदय होता है, तब ही जीव प्रभु चरणों तक पहुंचता है। “भगवान सामने हों तो मुस्कुराया करो, स्वयं को भाग्यशाली मानो—यह भी भक्ति का ही एक स्वरूप है।

धन, बुद्धि और आरोग्य—संभालने की आवश्यकता

मुनिश्री ने रावण का उदाहरण देते हुए समझाया कि धन, बुद्धि और निरोगी शरीर—तीनों यदि संयम से न संभाले जाएं, तो पतन का कारण बन जाते हैं।
जो कुछ भी तुम्हें मिला है, वह अच्छे कर्मों का परिणाम है और गुरु कृपा से मिला है। भविष्य में भी ऐसा चाहते हो तो यही सूत्र अपनाओ—आज अच्छा करोगे, तो कल भी अच्छा होगा।
उन्होंने आत्मा की आवाज सुनने और उसी के अनुरूप जीवन जीने का आह्वान किया।

23 जनवरी को तप कल्याणक, जैनेश्वरी दीक्षा का दिव्य प्रसंग

तप कल्याणक के अवसर पर तीर्थोदय गोलाकोट में अत्यंत महत्वपूर्ण आध्यात्मिक घटनाक्रम होने जा रहा है। जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने बताया कि इस दिन महाराजा नाभिराय का दरबार, आदिकुमार का राज्याभिषेक, विभिन्न राजाओं द्वारा भेंट समर्पण, राज्य-व्यवस्था, कृषि, वाणिज्य और शिल्प का उपदेश होगा।
इसके पश्चात नीलांजना नृत्य, नीलांजना का निधन और आदिकुमार का वैराग्य प्रसंग मंचित होगा। इसी क्रम में परम पूज्य मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज के कर-कमलों से जैनेश्वरी दीक्षा प्रदान की जाएगी—जो पंचकल्याणक का अत्यंत दुर्लभ और भावप्रवण क्षण होगा।

अशोकनगर जैन समाज देगा द्रव्य भेंट

श्री दिगंबर जैन पंचायत कमेटी अशोकनगर के अध्यक्ष राकेश कांसल ने जानकारी दी कि 23 जनवरी को प्रातः 7:30 बजे सुभाषगंज प्रांगण से अशोकनगर जैन समाज का प्रतिनिधिमंडल अपने-अपने वाहनों से अष्ट मंगल द्रव्य लेकर गोलाकोट पहुंचेगा।

इस अवसर पर मुनिश्री ससंघ को श्रीफल भेंट किए जाएंगे। कमेटी के पदाधिकारियों ने समाज के सभी बंधुओं से इस पुण्य अवसर में सहभागिता का आग्रह किया है।
सब कुछ छोड़कर जाओगे, तो सिद्ध भी बन सकते हो
मुनिश्री ने वैराग्य और आत्मबोध की पराकाष्ठा बताते हुए कहा—
सब कुछ छोड़कर यदि जाओगे, तो सिद्धशिला को भी प्राप्त कर सकते हो।
उन्होंने कहा कि जैसे स्वच्छ जल में तारे स्पष्ट दिखाई देते हैं, वैसे ही ज्ञानी को आत्मा का स्वरूप स्पष्ट दिखता है। यह मार्ग ‘मजा’ नहीं, बल्कि मजे से आगे का आनंद देता है।
ज्ञान, दर्शन, चारित्र और वीर्य—इन चारों को जानकर जब शुद्ध आत्मा की पहचान हो जाती है, तब आगे कुछ शेष नहीं रहता।

मंदिर खाली हाथ नहीं जाना चाहिए

मुनिश्री ने समाज को गहरी सीख देते हुए कहा—
मंदिर कभी खाली हाथ मत जाओ। अर्घ चढ़ाने से ही अतिशय बढ़ता है।
उन्होंने वर्तमान समय की प्रवृत्तियों पर चिंता जताई कि आज मंदिरों में देने वालों से अधिक लेने वालों की भीड़ बढ़ रही है।
जैनी मंदिर थाल भरकर जाता है और खाली हाथ लौटता है—यही भाग्यवान की पहचान है।
तीर्थोदय गोलाकोट में चल रहा पंचकल्याणक महामहोत्सव केवल अनुष्ठानों का क्रम नहीं, बल्कि आत्मा को जगाने वाला विराट आध्यात्मिक अभियान बन चुका है। मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज का यह संदेश हर श्रद्धालु के मन में गूंज रहा है—
मैं भाग्यवान हूं, जो भगवान के पंचकल्याणक देखने आया हूं।
यही भाव जब जीवन में उतरता है, तभी क्रिया धर्म बनती है और धर्म आनंद में परिवर्तित होता है।

ये ख़बर आपने पढ़ी देश के तेजी से बढ़ते लोकप्रिय हिंदी आज तेजी से बदलते परिवेश में जहां हर क्षेत्र का डिजिटलीकरण हो रहा है, ऐसे में
दैनिक तेजस रिपोर्टर
www.tejasreporter.com सटीक समाचार और तथ्यात्मक रिपोर्ट्स लेकर आधुनिक तकनीक से लैस अपने डिजिटल प्लेटफार्म पर प्रस्तुत है। अपने निडर, निष्पक्ष, सत्य और सटीक लेखनी के साथ…24X7
मैं पंकज जैन ✍️और मेरे सहयोगी अब आप तक देश विदेश की महत्वपूर्ण खबरों को पहुंचाने के लिए कटिबद्ध हैं।
ऐसी ही ताज़ा और अहम ख़बरों के लिए जुड़े रहें!
सभी अपडेट्स व नोटिफिकेशन प्राप्ति के लिए नीचे दिए गए बेल आइकन पर क्लिक कर अभी सब्सक्राइब करें।
Tejas Reporter
Author: Tejas Reporter

Join us on:

सबसे ज्यादा पड़ गई
Marketing Hack4u