जांच के नाम पर भ्रम, सवालों के घेरे में जनपद CEO संतोष मांडलिक

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विशेष संवाददाता | नरसिंहपुर
नरसिंहपुर मप्र | जनपद चावरपाठा की ग्राम पंचायत ढिलवार में बिना हस्ताक्षर और बिना मुहर के लाखों रुपये के भुगतान का मामला अब सिर्फ पंचायत स्तर का भ्रष्टाचार नहीं रह गया है, बल्कि यह जनपद स्तर की जवाबदेही और प्रशासनिक नीयत पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।

करीब एक माह पूर्व इस गंभीर मामले को मीडिया द्वारा जनपद पंचायत चावरपाठा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संतोष मांडलिक के संज्ञान में लाया गया था। उस समय CEO ने कहा था—“हम जांच करवाते हैं।लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी—
न जांच टीम बनी
न कोई आदेश सामने आया
न ही जांच शुरू होने का कोई प्रमाण

जांच या सिर्फ बयानबाजी?

जब-जब इस मामले को लेकर CEO संतोष मांडलिक से संपर्क किया गया, हर बार कोई न कोई बहाना सामने आया। कभी फाइल लंबित बताई गई, कभी व्यस्तता, तो कभी “देख रहे हैं” जैसा जवाब।
अब सवाल उठता है—क्या जनपद CEO जानबूझकर जांच को टाल रहे हैं? क्या यह मीडिया और जनता को गुमराह करने की कोशिश है? या फिर जांच में किसी बड़े नाम के सामने आने का डर?

“अभी फर्जी काम नहीं किया… आगे कर सकते हैं!”

इस पूरे मामले को और गंभीर बनाता है ग्राम पंचायत सचिव का वह चौंकाने वाला बयान, जिसमें उसने कहा—“अभी तक तो फर्जी काम नहीं किया… लेकिन दो साल बचे हैं, आगे फर्जी काम किया जा सकता है।”
यह बयान— सिर्फ गैर-जिम्मेदाराना नहीं
बल्कि भविष्य के भ्रष्टाचार की खुली घोषणा है
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कथन अपने आप में जांच का मजबूत आधार है, क्योंकि यह दिखाता है कि भ्रष्टाचार कोई गलती नहीं, बल्कि पूर्व नियोजित मानसिकता है।
कागजों में विकास, जमीन पर शून्य

चावरपाठा ब्लॉक की अधिकांश पंचायतों में—कागजों में विकास कार्य पूरे
भुगतान भी हो चुका
लेकिन जमीन पर न सड़क, न नाली, न निर्माण
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरपंच-सचिव की यह खुली लूट जनपद स्तर के अधिकारियों की जानकारी और संरक्षण के बिना संभव ही नहीं है।

क्या जनपद CEO जांच से डर रहे हैं?

ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच अब यह चर्चा आम है कि—कहीं ऐसा तो नहीं कि जांच में खुद जनपद स्तर की भूमिका उजागर होने का खतरा है, इसलिए जांच को दबाया जा रहा है?
यदि ऐसा नहीं है, तो फिर सवाल है—जांच की समय-सीमा क्यों तय नहीं की गई? भुगतान से जुड़े दस्तावेज अब तक सील क्यों नहीं हुए? संबंधित सचिव और कर्मचारियों को वित्तीय अधिकारों से अलग क्यों नहीं किया गया?

जिले में प्रशासनिक बेशर्मी के और उदाहरण

इसी नरसिंहपुर जिले में जिला पंचायत CEO गजेंद्र नागेश का एक वीडियो भी वायरल हो चुका है, जिसमें—
नर्मदा नदी के ब्रह्मांड घाट पर एक बुजुर्ग से अभद्रता एक युवक को थप्पड़ मारते हुए देखा गया जहां एक ओर भ्रष्टाचारियों को संरक्षण, वहीं दूसरी ओर जनता पर थप्पड़—यह जिले के प्रशासनिक चरित्र को उजागर करता है।

सवाल सिर्फ भ्रष्टाचार का नहीं, जवाबदेही का है

ढिलवार पंचायत मामला अब इस मोड़ पर है कि— अगर जांच नहीं होती
या जानबूझकर लटकाई जाती है
तो यह सीधे-सीधे प्रशासनिक मिलीभगत का संकेत माना जाएगा।
तेजस की टीम इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है।जनता अब सिर्फ यह जानना चाहती है—
CEO संतोष मांडलिक जांच “करेंगे” या “टालते रहेंगे”? और यदि जांच हुई, तो कब?
क्योंकि सवाल अब सिर्फ भ्रष्टाचार का नहीं,प्रशासन की नीयत और ईमानदारी की परीक्षा का है।
SURAJ MEHRA
Author: SURAJ MEHRA

साल 2022 से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत "सूरज मेहरा" आज भी निरंतर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मध्यप्रदेश की राजनीति, करंट अफेयर्स में विशेष रुचि है , साथ ही ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव है , यहाँ मध्यप्रदेश की हर छोटी बड़ी हलचल पर नज़र रहती है

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