भक्ति, अनुशासन और सनातन एकता के सैलाब में डूबी धर्मनगरी खनियाधाना मुनि पुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज के भव्य मंगल प्रवेश ने रचा स्वर्णिम इतिहास

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रिपोर्ट – अतुल कुमार जैन
खनियाधाना | धर्मनगरी खनियाधाना के इतिहास में 29 दिसंबर 2025 का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया, जब कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बीच भी आस्था, श्रद्धा और अनुशासन का अद्भुत संगम देखने को मिला। परम पूज्य युगशिरोमणि समाधि सम्राट आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महामुनिराज के आशीर्वाद के अनुपालन में उनके परम प्रभावक शिष्य, तीर्थचक्रवर्ती निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री 108 सुधासागर जी महामुनिराज ससंघ का खनियाधाना की पावन धरा पर ऐतिहासिक और भव्य मंगल प्रवेश हुआ।
सुबह जब तापमान मात्र 7 डिग्री सेल्सियस था और पूरा नगर घने कोहरे की चादर में लिपटा हुआ था, तब भी श्रद्धालुओं का उत्साह, भक्ति और अनुशासन मौसम पर भारी नजर आया। प्रातः 7 बजे करवाया रोड स्थित पुट्ठा फैक्ट्री से मुनि संघ का विहार प्रारंभ हुआ। कोहरा इतना घना था कि कुछ दूरी पर देख पाना कठिन था, किंतु नन्हे-मुन्ने बच्चों के जयघोष, “श्री पार्श्वनाथाय नमः ” के उद्घोष और भक्तों की अटूट आस्था ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

पनिहारा चौराहे पर हुआ संतों का मंगल मिलन
विहार के दौरान पनिहारा चौराहे पर उस समय भावुक और अलौकिक दृश्य उपस्थित हुआ, जब खनियाधाना में पूर्व से विराजमान मुनि श्री निरापद सागर जी महाराज ने मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज की अगवानी की। दो महान संतों के इस मंगल मिलन को देख श्रद्धालुओं की आंखें श्रद्धा से नम हो गईं। इसके पश्चात दोनों मुनि संघ एक साथ नगर की ओर प्रस्थान कर गए।
विधायक सहित जनप्रतिनिधियों ने किया पद विहार
मुनि संघ की अगवानी हेतु क्षेत्रीय विधायक श्री प्रीतम सिंह लोधी विशेष रूप से पहुंचे। उन्होंने मुनि श्री के चरणों में वंदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और पूरे जुलूस के दौरान पैदल विहार कर धर्म लाभ अर्जित किया। उनके साथ विभिन्न जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित रहे। सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर प्रशासन व पुलिस की टीम पूरी तरह मुस्तैद रही।
भव्य आगवानी महोत्सव बना आस्था और अनुशासन का प्रतीक

खनियाधाना तीर्थ की पावन भूमि पर आयोजित यह भव्य आगवानी महोत्सव केवल जैन समाज तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समस्त सनातनी हिंदू समाज के लिए सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का जीवंत उदाहरण बन गया।
चौरासी समाज द्वारा नये बस स्टैंड पर सामूहिक पाद-प्रक्षालन किया गया, जिसने अनुशासन और सामूहिक श्रद्धा की मिसाल पेश की। पूरे मार्ग में 12 जेसीबी मशीनों से पुष्पवर्षा कर जुलूस को दिव्य और अलौकिक स्वरूप प्रदान किया गया।
नगर बना सजीव तीर्थ नगरी
मुनि संघ के स्वागत हेतु नगर में 51 से अधिक स्टॉलों पर मिष्ठान्न एवं नाश्ते की भव्य व्यवस्था की गई। 250 से अधिक रंगोलियों, प्रत्येक घर के बाहर मंगल कलश और बंदनवार ने खनियाधाना को सजीव तीर्थ नगरी में परिवर्तित कर दिया। नगर में बनाए गए 84 से अधिक भव्य प्रवेश द्वारों ने आयोजन की भव्यता को और बढ़ा दिया। पूरा नगर भगवा, सफेद और पीले रंग की दिव्य छटा में सराबोर नजर आया।
सनातन एकता का सशक्त संदेश
इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता रही जैन समाज के साथ-साथ समस्त सनातनी हिंदू समाज की संगठित सहभागिता। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, बजरंग दल, विभिन्न मंदिर समितियां तथा सामाजिक व धार्मिक संगठनों ने सेवा, अनुशासन, सुरक्षा और व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभाई।
यह आयोजन यह संदेश देता है कि पंथ अलग हो सकते हैं, लेकिन सनातन संस्कृति की आत्मा एक है।

37 क्रमों में सुसज्जित विराट जुलूस
महोत्सव का मुख्य आकर्षण 37 से अधिक क्रमों में निकला विराट जुलूस रहा, जिसमें एमबी बैंड, ढोल-ताशे, घोड़े, धर्मध्वज, भगवा पताकाएं, लोकनृत्य, पारंपरिक वाद्य, बालिका व महिला मंडल, तीर्थीय प्रतिनिधि, सकल दिगंबर जैन समाज एवं सनातनी संगठनों की गरिमामयी उपस्थिति ने नगर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
अनुशासन ने बढ़ाई आयोजन की गरिमा
आयोजकों द्वारा जारी अनुशासनात्मक निर्देशों का श्रद्धालुओं ने पूरी निष्ठा से पालन किया। पुष्पवर्षा करने वाले श्रद्धालु सफेद वस्त्र, चौरासी टोपी और पीले दुपट्टे में नजर आए। पाद-प्रक्षालन केवल नये बस स्टैंड पर सामूहिक रूप से संपन्न हुआ, जिससे आयोजन की मर्यादा और गरिमा बनी रही।
जनप्रतिनिधियों की सहभागिता
कार्यक्रम में विधायक श्री प्रीतम लोधी, विधायक प्रतिनिधि, कांग्रेस प्रत्याशी श्री अरविंद लोधी, कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारी, भाजपा जिला मंत्री श्री मनीष अग्रवाल, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्री जितेंद्र जैन गोटू, पूर्व मंत्री श्री भैया साहब लोधी, जिला कार्यकारिणी सदस्य श्री प्रल्हाद सिंह यादव सहित अनेक जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने सहभागिता कर आयोजन को गौरव प्रदान किया।
खनियाधाना के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय
कुल मिलाकर खनियाधाना का यह भव्य आगवानी महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, अनुशासन और सनातन एकता का जीवंत प्रतीक बनकर उभरा। यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा और खनियाधाना को सनातन संस्कृति की एक मजबूत पहचान दिलाएगा

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Raju Atulkar
Author: Raju Atulkar

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