✍️ राजू अतुलकर (विशेष राजनीतिक रिपोर्ट)
भोपाल | भारतीय जनता पार्टी में राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन को लेकर चल रही अटकलों के बीच एक अहम घटनाक्रम ने सियासी हलचल को और तेज कर दिया है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ा दिया गया है। गृह मंत्रालय से मिले इनपुट के बाद यह फैसला लिया गया है, जिसके बाद दिल्ली से भोपाल तक राजनीतिक गलियारों में एक ही सवाल गूंज रहा है – क्या शिवराज सिंह चौहान बीजेपी के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष हो सकते हैं?
केंद्र से प्रदेश को पत्र, सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को औपचारिक पत्र भेजकर शिवराज सिंह चौहान की सुरक्षा व्यवस्था की तत्काल समीक्षा और आवश्यक बढ़ोतरी के निर्देश दिए हैं। इसके बाद मुख्यमंत्री ने डीजीपी को स्पष्ट आदेश जारी किए कि शिवराज के सभी कार्यक्रमों, सार्वजनिक आयोजनों और आवागमन के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
बताया जा रहा है कि खुफिया एजेंसियों को पाकिस्तान से जुड़े कुछ संदिग्ध इनपुट प्राप्त हुए हैं, जिसके आधार पर यह अलर्ट जारी किया गया। हालांकि, सरकार या पार्टी की ओर से किसी संभावित खतरे या राजनीतिक कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
Z+ सुरक्षा के बावजूद अतिरिक्त घेरा
शिवराज सिंह चौहान पहले से ही Z+ श्रेणी की सुरक्षा के दायरे में हैं, लेकिन अब दिल्ली और भोपाल -दोनों जगह उनके आवास और कार्यक्रम स्थलों पर अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। बैरिकेडिंग, मूवमेंट कंट्रोल और इंटेलिजेंस मॉनिटरिंग को और मजबूत किया गया है।
सुरक्षा बढ़ी, अटकलें तेज
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है। बीजेपी के मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और संगठन नए नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में शिवराज सिंह चौहान का नाम बार-बार सामने आना महज संयोग नहीं माना जा रहा। संगठनात्मक अनुभव, जनस्वीकृति और लंबे राजनीतिक सफर के चलते वे एक मजबूत दावेदार के रूप में देखे जा रहे हैं।
इतिहास भी देता है संकेत
यह पहला मौका नहीं है जब किसी बड़े पद से पहले सुरक्षा बढ़ाई गई हो। जब शिवराज सिंह चौहान को पहली बार मुख्यमंत्री बनाए जाने की तैयारी थी, तब भी उनके आवास के बाहर इसी तरह सुरक्षा कड़ी की गई थी। यही नहीं, बाबूलाल गौर के मुख्यमंत्री बनने से पहले भी उनके घर और कार्यालय के बाहर बैरिकेड्स लगाए गए थे। तब चर्चाएं सच साबित हुई थीं और यही वजह है कि मौजूदा घटनाक्रम को भी उसी नजर से देखा जा रहा है।
शिवराज का बयान: ‘फोकस किसानों पर’
हालांकि शिवराज सिंह चौहान सार्वजनिक मंचों पर राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की दौड़ से खुद को अलग बताते रहे हैं। उनका कहना है कि उनका पूरा ध्यान कृषि मंत्रालय और किसानों से जुड़े कार्यों पर केंद्रित है। लेकिन राजनीति के जानकार मानते हैं कि कई बार इनकार ही सबसे बड़ा संकेत होता है।
राजनीतिक विशेषज्ञों की राय
राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, शिवराज सिंह चौहान संभावित नामों में सबसे मजबूत हैं, लेकिन अंतिम फैसला पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, संगठनात्मक चुनाव और आरएसएस की सहमति से ही होगा।
अगर मुहर लगी, तो इतिहास बनेगा
अगर शिवराज सिंह चौहान को बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना जाता है, तो वे मध्य प्रदेश से इस पद तक पहुंचने वाले तीसरे नेता होंगे। उनसे पहले अटल बिहारी वाजपेयी (ग्वालियर) और कुशाभाऊ ठाकरे (धार) यह जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। ऐसा होने पर मध्य प्रदेश वह राज्य बन जाएगा, जिसने बीजेपी को सबसे अधिक राष्ट्रीय अध्यक्ष दिए हैं।
सुरक्षा में बढ़ोतरी सिर्फ एक प्रशासनिक कदम है या आने वाले बड़े राजनीतिक फैसले का संकेत
-यह तो वक्त बताएगा। लेकिन इतना तय है कि शिवराज सिंह चौहान को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो चुकी है, और हर नजर अब बीजेपी के अगले कदम पर टिकी है।
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Author: Raju Atulkar
"पत्रकारिता सिर्फ पेशा नहीं, जिम्मेदारी भी है…" साल 2015 से कलम की स्याही से सच को उजागर करने की यात्रा जारी है। समसामयिक मुद्दों की बारीकियों को शब्दों में ढालते हुए समाज का आईना बनने की कोशिश। — राजू अतुलकर, तेजस रिपोर्टर डिजिटल





