3000 वर्ष पुराना गोलाकोट अतिशय क्षेत्र फिर सुर्खियों में, नए मंदिर के पंचकल्याणक की तैयारियाँ तेज

SHARE:

✍️ अतुल कुमार जैन
शिवपुरी, मध्यप्रदेश | खनियाधाना नगर से मात्र 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गोलाकोट अतिशय क्षेत्र अपनी अद्भुत ऐतिहासिकता, आध्यात्मिक महत्ता और रहस्यमयी किंवदंतियों के कारण आज भी जैन धर्म अनुयायियों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहाँ विराजमान मूलनायक आदिनाथ भगवान की अप्रतिम प्राचीन प्रतिमा अपने अद्वितीय सौंदर्य, सूक्ष्म नक्काशी और अनोखी शिल्पकला के कारण दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती है। इस क्षेत्र के वास्तविक निर्माणकाल का कोई पुख्ता प्रमाण उपलब्ध न होने के कारण इसके इतिहास पर रहस्य की परतें चढ़ी हुई हैं, फिर भी स्थानीय वरिष्ठ जनों और जैनाचार्यों के कथन के आधार पर यह माना जाता है कि गोलाकोट क्षेत्र न्यूनतम लगभग 3000 वर्ष प्राचीन है। इस अनुमान का एक महत्वपूर्ण आधार यह भी है कि यहाँ अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर की प्रतिमा मौजूद नहीं है, जिससे यह संकेत मिलता है कि यह तीर्थ उनसे पूर्व का होना चाहिए।
नए मंदिर का पंचकल्याणक महोत्सव 20 से 25 जनवरी तक पूज्य मुनि पुंगव पूज्य श्री 108 सुधा सागर जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित होने जा रहा है।
इतिहास के क्रम में इस क्षेत्र से जुड़ी अनेक घटनाएँ इसके महत्व और संवेदनशीलता को सिद्ध करती हैं। बताया जाता है कि कभी यहाँ लगभग 700 जैन परिवार निवास करते थे, जो समय के साथ धीरे-धीरे खनियाधाना नगर की ओर स्थानांतरित हो गए। परंतु गोलाकोट क्षेत्र अपनी चमत्कारिक मान्यताओं और अतिशय घटनाओं के कारण सदैव चर्चाओं में बना रहा। बीते दशकों में यहाँ अनेक बार अंतरराज्यीय चोरी गिरोहों ने मूर्तियों को नुकसान पहुंचाने या चुराने का प्रयास किया, परंतु हर बार वे पकड़े गए। एक घटना में मूर्तियाँ समुद्री बंदरगाह पर बरामद की गईं। 80 के दशक में जब क्षेत्र बिल्कुल सुनसान था, तब नगर के स्वर्गीय दयाचंद जैन को स्वप्न में चोरी की सूचना मिली। वे तुरंत अपने साथियों सहित स्थल पर पहुँचे और चोरी में शामिल लोगों को पकड़वाकर क्षेत्र की रक्षा की। इस अद्वितीय साहस के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा उनका सम्मान भी किया गया।

साल 2000 में तो एक गिरोह द्वारा 48 प्रतिमाओं के सिर काटे जाने की भयावह घटना हुई, जिससे पूरा क्षेत्र और नगर दहल उठा। उस समय पूरा खनियाधाना बंद रहा और प्रशासन ने तत्परता से सभी मूर्तियों को वापस बरामद किया। किंवदंती यह भी कहती है कि उसी गिरोह के सरदार ने मूलनायक आदिनाथ भगवान की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने से मना कर दिया, क्योंकि वह प्रतिमा उसे दिव्य और अलौकिक प्रतीत हुई। एक अन्य कथा के अनुसार, जब चोरों ने प्रतिमा को काटने के लिए छेनी लगाई, तो उसमें से दूध की धारा बह निकली और भयभीत होकर चोर भाग गए।

वर्ष 2012 में राजस्थान के एक गिरोह ने यात्री बनकर धोखे से पार्श्वनाथ भगवान की खड़गासन प्रतिमा चोरी कर ली, जिसके विरोध में जैन समाज ने विनयभैया जी के नेतृत्व में लंबे समय तक आंदोलन किया। अंततः प्रतिमा पुलिस द्वारा बरामद कर ली गई और क्षेत्र को पुनः सुरक्षित किया गया।

गोलाकोट क्षेत्र में स्थित प्राचीन बावड़ी भी अपने आप में रहस्य और चमत्कार का प्रतीक मानी जाती है। मान्यता है कि प्राचीन काल में यहाँ मांगने पर हर आवश्यकता की वस्तु मिल जाती थी और उपयोग के बाद उसे पुनः वापस रखना पड़ता था। यह क्षेत्र अनेक आध्यात्मिक और दिव्य घटनाओं का साक्षी रहा है।

2012 की मूर्ति चोरी की घटना के बाद गोलाकोट का पुनरुत्थान तब तेज हुआ, जब मुनि पुंगव पूज्य श्री 108 सुधा सागर जी महाराज के चरण यहाँ पड़े। उनके मार्गदर्शन में क्षेत्र का व्यापक विकास हुआ। आज यहाँ लगभग 300 लोगों के ठहरने की आधुनिक सुविधा, एसी भोजनशाला, विशाल नव-निर्मित मंदिर और दशकों पुराना प्राचीन जैन मंदिर सभी श्रद्धालुओं के लिए एक दिव्य आध्यात्मिक अनुभव प्रस्तुत करते हैं। इस भव्य नए मंदिर का पंचकल्याणक महोत्सव 20 से 25 जनवरी तक पूज्य मुनि पुंगव पूज्य श्री 108 सुधा सागर जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित होने जा रहा है।

यातायात की दृष्टि से यह क्षेत्र भी अत्यंत सुविधाजनक है। गोलाकोट के निकट 30 किलोमीटर दूर वसई रेलवे स्टेशन है, 65 किलोमीटर पर ललितपुर स्टेशन और लगभग 80 किलोमीटर की दूरी पर झाँसी जंक्शन स्थित है। आसपास पचराई जैन तीर्थ, थूबोंन जी अतिशय क्षेत्र और ऐतिहासिक चंदेरी पर्यटन स्थल जैसे दर्शनीय स्थान भी तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

गोलाकोट केवल एक जैन तीर्थ नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास, चमत्कार, सुरक्षा और पुनर्जागरण की कहानी है—एक ऐसा स्थल जहाँ धर्म, विश्वास और पुरातत्त्व की गहराइयाँ एक साथ मिलकर एक अद्भुत आध्यात्मिक संसार का निर्माण करती हैं।

ये ख़बर आपने पढ़ी देश के तेजी से बढ़ते लोकप्रिय हिंदी आज तेजी से बदलते परिवेश में जहां हर क्षेत्र का डिजिटलीकरण हो रहा है, ऐसे में
दैनिक तेजस रिपोर्टर
www.tejasreporter.com सटीक समाचार और तथ्यात्मक रिपोर्ट्स लेकर आधुनिक तकनीक से लैस अपने डिजिटल प्लेटफार्म पर प्रस्तुत है। अपने निडर, निष्पक्ष, सत्य और सटीक लेखनी के साथ…24X7
मैं पंकज जैन ✍️और मेरे सहयोगी अब आप तक देश विदेश की महत्वपूर्ण खबरों को पहुंचाने के लिए कटिबद्ध हैं।ऐसी ही ताज़ा और अहम ख़बरों के लिए जुड़े रहें!सभी अपडेट्स व नोटिफिकेशन प्राप्ति के लिए नीचे दिए गए बेल आइकन पर क्लिक कर अभी सब्सक्राइब करें
PANKAJ JAIN
Author: PANKAJ JAIN

पत्रकारिता में 2009 से सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। "दैनिक अग्निबाण" में लंबी पारी के बाद "SCN NEWS" सहित कई संस्थानों में न्यूज़ डेस्क का नेतृत्व किया। वर्तमान में सा. "क्राइम अगेंस्ट न्यूज", दैनिक "तेजस रिपोर्टर" और कई डिजिटल प्लेटफार्म के संपादकीय प्रमुख हैं। सामाजिक सरोकारों, विशेषकर हाशिए पर खड़े वर्ग और अन्याय के मुद्दों पर लेखन में विशेष रुचि रखते हैं। इसके साथ ही "जिनोदय" और "पंकज का पंच" जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के निदेशक हैं, जो जनचेतना और वैचारिक संवाद को बढ़ावा देने का माध्यम हैं।

Join us on:

सबसे ज्यादा पड़ गई
Marketing Hack4u