रायसेन में 80–90 के दशक का पुराना पुल ढहा, दो बाइकें गिरीं; चार लोग घायल – ग्रामीणों में आक्रोश

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रिपोर्ट – राजू अतुलकर
रायसेन | मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में बरेली–पिपरिया स्टेट हाईवे पर स्थित नयागांव का पुराना पुल सोमवार दोपहर अचानक भरभराकर गिर गया। पुल ध्वस्त होने के उस समय दो मोटरसाइकिलें पुल पार कर रही थीं, जो सीधे मलबे में जा समाईं। हादसे में दोनों बाइकों पर सवार कुल चार लोग गंभीर रूप से घायल हुए। घायलों को तत्काल बरेली सिविल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है।
आवागमन ठप, हाईवे पूरी तरह बंद
पुल गिरते ही बरेली–पिपरिया मार्ग को तत्काल बंद कर दिया गया। इस रूट के बाधित होने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और कई वाहन वैकल्पिक रास्तों की तलाश में भटकते दिखे।
घटना की खबर मिलते ही थाना प्रभारी, एसडीओपी और तहसीलदार समेत प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंच गया। मलबा हटाने और यातायात बहाल करने के प्रयास जारी हैं।
मजदूरों ने भागकर बचाई जान
प्रत्यक्ष दर्शियों के अनुसार हादसे के समय पुल के नीचे निर्माण और मरम्मत का कार्य चल रहा था। वहां मौजूद मजदूरों ने जैसे ही ऊपर से पुल में दरार और कंपन महसूस किया, वे तुरंत हट गए। उनकी तत्परता ने बड़ी जनहानि को टाल दिया, वरना स्थिति कहीं अधिक भयावह हो सकती थी।
चार दशक पुराना पुल – सिस्टम की बड़ी चूक?
सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि यह पुल लगभग 80–90 के दशक में निर्मित हुआ था और लंबे समय से जर्जर स्थिति में था। मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार चारों घायलों का इलाज जारी है
एमपीआरडीसी की भूमिका पर सवाल
स्थानीय लोग इस हादसे को एमपीआरडीसी की गंभीर लापरवाही बता रहे हैं। उनका कहना है कि पुल की आयु पूरी होने के बावजूद उस पर नियमित निगरानी और समय पर रखरखाव नहीं किया गया। ग्रामीणों में इस घटना को लेकर नाराजगी साफ झलक रही है। कई लोग पूछ रहे हैं-
“अगर पुल नीचे मजदूर काम कर रहे थे, तो ऊपर से यातायात क्यों चालू रखा गया?”
जिम्मेदारी कौन लेगा?
यह हादसा एक बार फिर प्रदेश में पुराने पुलों और सड़कों की सुरक्षा पर सवाल खड़ा करता है। क्या समय रहते निरीक्षण और रखरखाव किया जाए तो ऐसे हादसे टाले जा सकते हैं? क्या पुरानी संरचनाओं पर यातायात सीमित करने या अस्थायी रूप से बंद करने की आवश्यकता थी?
इन सवालों के जवाब प्रशासन को देने ही होंगे।
अंततः, नयागांव पुल का ढहना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की उस खामोशी का संकेत है जो चेतावनी के बावजूद नहीं जागी। अब ज़रूरी है कि जिम्मेदारी तय हो और ऐसे पुलों की तात्कालिक जांच की जाए, ताकि अगली दुर्घटना ‘अचानक’ न हो – रोकी जा सके।

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Raju Atulkar
Author: Raju Atulkar

"पत्रकारिता सिर्फ पेशा नहीं, जिम्मेदारी भी है…" साल 2015 से कलम की स्याही से सच को उजागर करने की यात्रा जारी है। समसामयिक मुद्दों की बारीकियों को शब्दों में ढालते हुए समाज का आईना बनने की कोशिश। — राजू अतुलकर, तेजस रिपोर्टर डिजिटल

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