✍️ रिपोर्ट : अ.स. हेमलता जैन
भोपाल, मध्यप्रदेश | अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के पावन अवसर पर राजधानी के अवधपुरी स्थित श्री विद्याप्रमाण गुरुकुलम् में “भावना योग” पर एक विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम का भव्य आयोजन हुआ। इस अद्वितीय साधना में हजारों श्रद्धालुओं एवं योग साधकों ने सहभागी बनकर इसे ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया।
इस विशेष अवसर पर महामण्डलेश्वर अनिलानन्द जी की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और भी ऊँचाइयों तक पहुँचाया। उन्होंने अपने विचार साझा करते हुए कहा,

“योग आज केवल शारीरिक क्रिया न रहकर, भारत की सांस्कृतिक धरोहर बन विश्वभर में चेतना का संचार कर रहा है। भावना योग वह माध्यम है, जो आंतरिक निर्मलता और आत्मिक उत्थान की राह खोलता है।”
कार्यक्रम की विशेषता रही मुनिश्री 108 प्रमाणसागर जी महाराज का भावपूर्ण संबोधन, जिसने उपस्थित जनसमूह के हृदय को गहराई से छुआ। उन्होंने कहा—

“दुनिया आज जिस योग की बात करती है, वह केवल देह तक सीमित है। लेकिन सच्चा योग वह है जो मन और आत्मा को जोड़कर व्यक्ति को उसकी अंतरात्मा से साक्षात्कार कराए। भावना योग आत्मिक अनुशासन, समर्पण और संतुलन की ओर ले जाने वाला सेतु है।”
इस अवसर पर भावना योग के विभिन्न चरणों का अभ्यास कराया गया, जिनमें ऊर्जा जागरण, संकल्प ध्यान, आत्मस्वीकृति तथा प्रार्थना साधना प्रमुख रहीं। गुरुकुलम् परिसर सामूहिक मंगल भावना के मधुर गायन से गुंजायमान हो उठा, जिसने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

इस समारोह में शहर के प्रतिष्ठित योगाचार्य, संतवर्ग, विद्यार्थी, महिलाएं तथा वरिष्ठ नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। आयोजन का समापन सामूहिक आशीर्वचन एवं मंगल भावना के साथ हुआ।








