अब नहीं चलेगी निजी स्कूलों की मनमानी : कलेक्टर की दो टूक चेतावनी, 400 से अधिक स्कूल संचालकों की मौजूदगी में बैठक संपन्न

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✍️ रिपोर्ट : अतुल कुमार जैन
रायसेन, मध्य प्रदेश | जिले के निजी स्कूलों की मनमानी पर अब सख्त रोक लगने जा रही है। जिला कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब न तो मनमानी फीस वसूली होगी, न हर साल किताबों और ड्रेस का तमाशा।

तेजस रिपोर्टर की पड़ताल लाई रंग
पिछले दिनों तेजस रिपोर्टर ने निजी स्कूलों की अनियमितताओं को उजागर करते हुए कलेक्टर से सीधा संवाद किया था। विषय थे – हर साल बदला जाने वाला पाठ्यक्रम, ड्रेस कोड में बदलाव, बेहिसाब फीस, और स्मार्ट क्लास के नाम पर अतिरिक्त शुल्क।
इस रिपोर्टिंग का असर जमीन पर तब देखने को मिला जब 9 अप्रैल को जिला स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें जिले के 540 में से 400 से अधिक स्कूल संचालक शामिल हुए।

बैठक के मुख्य निर्णय

डायट भवन रायसेन में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता स्वयं कलेक्टर श्री अरुण कुमार विश्वकर्मा ने की। बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्रीमती अंजू पवन भदौरिया, डीपीसी, और विकासखण्ड स्तरीय अधिकारी भी उपस्थित रहे।
बैठक में निम्नलिखित बिंदुओं पर गंभीर चर्चा और ठोस निर्णय लिए गए :
>> स्कूल जिस बोर्ड से मान्यता प्राप्त हैं, केवल उसी के पाठ्यक्रम के अनुसार पुस्तकें पढ़ाई जाएंगी।
>> निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें नहीं चलेंगी और पालकों पर दबाव नहीं बनाया जाएगा।
>> स्मार्ट क्लास के नाम पर अतिरिक्त फीस वसूली पर तत्काल रोक के निर्देश।
>> स्कूल बैग का बोझ कम करने के निर्देश।
>> बच्चों की यूनिफॉर्म ऐसी हो जो तीन वर्षों तक बदले बिना पहनी जा सके।
>> किसी भी बच्चे या पालक पर किताब, कॉपी, यूनिफॉर्म किसी विशेष दुकान से खरीदने का दबाव न बनाया जाए।
>> फीस जमा न होने की स्थिति में किसी बच्चे को पढ़ाई से वंचित या स्कूल से बाहर न किया जाए।

कलेक्टर ने कहा– “फीस की वजह से बच्चे की पढ़ाई नहीं रुकेगी
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि अगर कोई बच्चा फीस न भर पाने के कारण स्कूल से निकाला जा रहा है, तो स्कूल संचालक सीधे मेरे पास आएं। यदि कारण उचित पाया गया, तो मैं स्वयं उस बच्चे की फीस भरवाऊंगा।

पालकों से संवाद का नया रास्ता :

अब हर शुक्रवार शाम 3 से 5 बजे तक, कोई भी पालक बिना किसी मध्यस्थ के सीधे कलेक्टर से मिलकर अपनी समस्याएं रख सकेगा। यह पहल अभिभावकों के अधिकारों को मजबूत बनाएगी।

बैठक में एक दृश्य ऐसा भी :

जब डीपीसी ने मंच से संकेत दिया कि “सर, बहुत समय लग रहा है”, तब कलेक्टर ने मंच से ही कहा—
बदलाव के लिए समय देना ही पड़ेगा।
लेकिन कुछ संचालक मुद्दों से भटके रहे
बैठक में कई स्कूल संचालकों ने अपनी समस्याएं तो खुलकर रखीं, लेकिन पालकों की परेशानियों पर चुप्पी साधे रहे। इस पर कलेक्टर ने दो टूक चेतावनी दी :
“यदि अब भी शिकायतें आती रहीं, तो प्रशासन सख्त कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।”

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