नगर पालिका के गलियारों से : सत्ता, धर्म और प्रशासन का खेल

SHARE:

✍️ रिपोर्ट : राकेश कुमार जैन
नगर प्रशासन का कार्य जनसेवा और विकास की गति को आगे बढ़ाना होता है, लेकिन जब यह व्यवस्था राजनीति और व्यक्तिगत स्वार्थ के रंग में रंगने लगे, तो शहर की जनता सवाल उठाने लगती है। रायसेन नगर पालिका का ताजा घटनाक्रम भी कुछ ऐसा ही है, जहाँ तीर्थ यात्रा और बजट सत्र की टाइमिंग ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
एक ओर शहर आर्थिक संकट और प्रशासनिक अव्यवस्था से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर पार्षदों की ‘धार्मिक यात्रा’ और बजट पारित होने की ‘सहजता’ ने इस पूरे प्रकरण को संदेह के घेरे में ला दिया है। क्या यह वाकई भगवान की कृपा थी, या फिर एक सोची-समझी रणनीति? विपक्ष की खामोशी और सत्ता पक्ष की चुप्पी क्या संकेत देती है?
इस रिपोर्ट में हम इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश करेंगे, और देखेंगे कि नगर पालिका के गलियारों में किस तरह राजनीति, धर्म और प्रशासन की धारा बह रही है।

तीर्थ यात्रा के बाद बिना विरोध के पारित हुआ नगर पालिका बजट!

भारत एक धर्मप्रधान देश है, और यहाँ धर्म की आड़ में कई बड़े फैसले बड़ी सहजता से लिए जा सकते हैं। रायसेन नगर पालिका, जो आर्थिक तंगी से गुजर रही है, के पार्षदों की तीर्थ यात्रा इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है।

दरअसल, नगर पालिका का बजट पास होना था, लेकिन इससे पहले ही नपा अध्यक्ष के पति और विधायक प्रतिनिधि जमना सेन ने पार्षदों को राजस्थान के मेहंदीपुर बालाजी, खाटू श्याम और मथुरा सहित विभिन्न तीर्थ स्थलों की यात्रा पर भेज दिया। इस यात्रा का असर बजट बैठक में साफ देखने को मिला—मेज थपथपा कर मात्र आधे घंटे में ₹5 लाख का बजट पारित कर दिया गया!

भगवान की कृपा या राजनीति की चाल?

शहर में चर्चा जोरों पर है कि “भगवान की कृपा” से यह बजट बिना किसी विरोध के पारित हो गया। लगभग 8 पार्षद और उनके प्रतिनिधि इस यात्रा में शामिल थे। यह बात शायद गुप्त रहती, लेकिन सोशल मीडिया पर उनकी उपस्थिति ने पूरे शहर को इस योजना की भनक लगा दी।

पाँच दिन अंधेरे में डूबा शहर, फिर भी खामोश विपक्ष!

मध्य प्रदेश विद्युत वितरण कंपनी का करीब ₹3.30 करोड़ का बकाया बिल न चुकाने के कारण शहर की स्ट्रीट लाइट्स पाँच दिनों तक बंद रहीं, जिससे पूरा शहर अंधेरे में डूब गया। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि न केवल विपक्ष बल्कि सत्ता पक्ष के पार्षद भी इस मुद्दे पर पूरी तरह से चुप्पी साधे रहे।

मीडिया ने जब इस विषय को प्रमुखता से उठाया, तब जाकर नगर पालिका के पार्षद और विधायक प्रतिनिधि हरकत में आए। आनन-फानन में कंपनी के कार्यालय जाकर उन्होंने निवेदन किया कि ईद और नवरात्रि के समय बिजली बहाल कर दी जाए। सूत्रों के अनुसार, ₹9 लाख का भुगतान कर अस्थायी रूप से बिजली व्यवस्था बहाल करवाई गई। अब देखना यह है कि आर्थिक संकट से जूझ रही नगर पालिका पर बिजली कंपनी कब तक मेहरबान रहती है।

पार्षदों की एकता बनी चर्चा का विषय

नगर पालिका का बजट सत्र बेहद दिलचस्प रहा। ₹77.82 करोड़ की आय और ₹77.77 करोड़ के व्यय का 14-बिंदुओं वाला एजेंडा नगर पालिका अध्यक्ष सविता सेन ने पढ़कर सुनाया, जिसे जेई आशुतोष सिंह ने आगे समझाया। पार्षदों ने बिना किसी बहस के मेज थपथपा कर सभी प्रस्तावों को पारित कर दिया।
अब शहरवासी यह कह रहे हैं कि अगर यही एकता और समानता नगर के विकास में भी दिखे, तो शहर का भविष्य उज्ज्वल हो सकता है।

क्या होगा अगला कदम?

शहर की जनता यह देख रही है कि नगर पालिका की यह कार्यप्रणाली किस ओर जाएगी। क्या यह केवल व्यक्तिगत स्वार्थ तक सीमित है, या फिर नगर के विकास में भी इसी तरह की तत्परता दिखाई जाएगी? अगले कॉलम में हम इन विषयों पर और गहराई से चर्चा करेंगे।

ये ख़बर आपने पढ़ी देश के तेजी से बढ़ते लोकप्रिय हिंदी न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म 🖱️www.tejasreporter.com पर
📱आज तेजी से बदलते परिवेश में जहां हर क्षेत्र का डिजिटलीकरण हो रहा है, ऐसे में
📰 “दैनिक तेजस रिपोर्टर
🌐 www.tejasreporter.com सटीक समाचार और तथ्यात्मक रिपोर्ट्स लेकर आधुनिक तकनीक से लैस अपने डिजिटल प्लेटफार्म पर प्रस्तुत है। अपने निडर, निष्पक्ष, सत्य और सटीक लेखनी के साथ…
मैं पंकज जैन ✍🏻 और मेरे सहयोगी अब ⏱️24X7 आप तक देश विदेश की महत्वपूर्ण खबरों को पहुंचाने के लिए कटिबद्ध हैं।
ऐसी ही ताज़ा और अहम ख़बरों के लिए जुड़े रहें! सभी अपडेट्स व नोटिफिकेशन प्राप्ति के लिए नीचे दिए गए बेल आइकन पर क्लिक कर अभी सब्सक्राइब करें।
Tejas Reporter
Author: Tejas Reporter

Join us on:

सबसे ज्यादा पड़ गई
Marketing Hack4u