रिपोर्ट-आजम खान
भोपाल | नगर निगम की सफाई व्यवस्था की पोल तब खुली, जब वार्ड 78 में आफताब मस्जिद के पास निगम कर्मचारियों ने सफाई की औपचारिकता निभाने के नाम पर कचरे में आग लगा दी। देखते ही देखते काले धुएं के गुबार हवा में घुलने लगे, जिससे आसपास के घरों में रहने वाले लोग परेशान हो गए। दमघोंटू धुएं से कई रहवासी घंटों तक घरों से बाहर रहने को मजबूर हो गए।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह पहली बार नहीं हुआ। निगम कर्मचारी हफ्तों तक सफाई करने नहीं आते, और जब आते हैं, तो कचरा उठाने की बजाय उसमें आग लगा देते हैं। कई बार वार्ड 78 के एचओ और दरोगा को इसकी शिकायत दी गई, लेकिन हर बार मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
हादसे का जिम्मेदार कौन?
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अगर इस आग से किसी वाहन में आग लग जाती तो कौन जिम्मेदार होता?
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अगर धुएं से किसी बुजुर्ग या बच्चे की तबीयत बिगड़ जाती तो कौन जवाबदेह होता?
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वार्ड अधिकारी और दरोगा साहब, जो मौके पर आने की जहमत तक नहीं उठाते?
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या फिर वे कर्मचारी, जो सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति करते हैं?
कर्मचारियों की दलील – “हमारा काम कचरा इकट्ठा करना, उठाना नहीं!”
नाम न छापने की शर्त पर एक सफाई कर्मचारी ने बताया कि “हमारा काम सिर्फ कचरा इकट्ठा करना है, उठाने का काम कचरा गाड़ी वालों का है। लेकिन पूरे वार्ड में सिर्फ 10-15 सफाईकर्मी हैं और वार्ड बहुत बड़ा है, इसलिए जल्दबाजी में कचरे में आग लगा देते हैं।”
क्या सफाई कर्मचारियों की हाजिरी में बड़ा घोटाला?
सूत्रों के अनुसार :
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आधे सफाई कर्मचारी ड्यूटी पर आते ही नहीं, लेकिन कागजों में उनकी हाजिरी दर्ज होती है।
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इन फर्जी कर्मचारियों की सैलरी का पैसा अंदर ही अंदर बांट लिया जाता है।
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ज़ोन 17 के अधिकतर कर्मचारी कभी भी फील्ड पर नहीं दिखते।
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कुछ कर्मचारियों को तो इलाके में किसी ने कभी देखा तक नहीं!
महापौर और निगम कमिश्नर कब लेंगे एक्शन?
यह मामला सीधे नगर निगम में बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। यदि आरटीआई (RTI) के जरिए इन कर्मचारियों की वास्तविकता जांची जाए, तो यह साफ हो सकता है कि कौन से कर्मचारी सच में काम कर रहे हैं और कौन सिर्फ तनख्वाह ले रहे हैं।
जनता की मांग :
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नगर निगम द्वारा तत्काल इस मामले की जांच की जाए।
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सफाई कर्मियों की वास्तविक उपस्थिति का ऑडिट हो।
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आग लगाने वाले कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई हो।
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वार्ड 78 के एचओ और दरोगा की ज़िम्मेदारी तय की जाए।








