रिपोर्ट-अतुल कुमार जैन
मध्यप्रदेश के श्योपुर-शिवपुरी बॉर्डर पर स्थित कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) में एक बार फिर चीतों की सुरक्षा पर सवाल उठ गए हैं। रविवार रात वीरपुर तहसील के ग्राम श्यामपुर में पांच चीते देखे गए, जो कूनो से बाहर निकलकर निर्माणाधीन श्योपुर-ग्वालियर ब्रॉडगेज रेलवे ट्रैक के पास पहुंचे थे। जैसे ही गांववालों को इनकी मौजूदगी का पता चला, हड़कंप मच गया।

सोमवार सुबह ये चीते कूनो नदी के पास पहुंचे। उसी दौरान, मादा चीता ज्वाला (Cheetah Jwala) और उसके चार शावकों ने सड़क पार करते हुए एक गाय पर झपट्टा मार दिया। यह देख ग्रामीणों ने लाठी-डंडे उठाए और चीतों को भगाने के लिए पत्थर फेंकने लगे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मादा चीता ने गाय का गला दबोच लिया था, लेकिन जब उसे चोट पहुंची तो उसने गाय को छोड़ दिया और शावकों के साथ जंगल की ओर भाग गई।
वन विभाग की अपील बेअसर
घटना के दौरान, मौके पर मौजूद वन विभाग की रेस्क्यू टीम ग्रामीणों से बार-बार अनुरोध करती रही कि वे चीतों को नुकसान न पहुंचाएं। लेकिन डर और गुस्से से भरे ग्रामीणों ने चेतावनी अनसुनी कर दी और चीतों को खदेड़ते रहे।
चीते जंगल से बाहर क्यों आए?
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विशेषज्ञों के अनुसार, चीतों का जंगल से बाहर आना उनके लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
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भोजन की तलाश: कूनो नेशनल पार्क में शिकार की कमी के कारण चीते इंसानी बस्तियों की ओर बढ़ सकते हैं।
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इलाका विस्तार: नए वातावरण में खुद को स्थापित करने के लिए चीते अपनी सीमा का विस्तार कर रहे हैं।
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संरक्षण में खामियां: चीतों को सुरक्षित रखने के लिए अभी भी कई कड़े कदम उठाने की जरूरत है।
भारत में चीतों का भविष्य खतरे में?
मध्यप्रदेश सरकार ने नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीतों को कूनो नेशनल पार्क में बसाने की योजना बनाई थी, लेकिन यह घटना दर्शाती है कि चीतों और इंसानों के बीच संघर्ष बढ़ रहा है। अगर इस समस्या का समाधान जल्द नहीं निकाला गया, तो भारत में चीतों का संरक्षण मुश्किल हो सकता है।
निष्कर्ष :
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चीतों का जंगल से बाहर निकलना उनके लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
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ग्रामीणों और वन्यजीवों के बीच संघर्ष को रोकने के लिए जागरूकता अभियान जरूरी है।
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वन विभाग को चीतों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने होंगे।
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अगर समय रहते समाधान नहीं निकला, तो भारत में चीतों का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।







