रिपोर्ट-अतुल कुमार जैन अशोकनगर | भगवान श्री आदिनाथ स्वामी, जिन्हें अंतिम कुलकर महाराजा नाभीराय के पुत्र राजा ऋषभदेव के नाम से भी जाना जाता है, की जन्म जयंती रविवार को अत्यंत श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाई गई। इस पावन अवसर पर श्री दिगंबर जैन पंचायत कमेटी के तत्वावधान में परम पूज्य मुनि श्री अविचल सागर जी महाराज के सान्निध्य में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। नगर को तोरणद्वारों, रंगोली और फूलों से सजाया गया, जबकि श्रद्धालुओं ने श्रीफल भेंट कर आरती उतारी।
भक्ति और उल्लास से गूंजा नगर, शोभायात्रा में उमड़ा जनसैलाब
आदिनाथ दिगंबर जैन प्राचीन मंदिर में परम पूज्य मुनि श्री अविचल सागर जी के सान्निध्य में मंगलाष्टक और प्रभु आराधना के साथ जयंती समारोह का शुभारंभ हुआ। इसके बाद भगवान आदिनाथ की रजत पालकी को भक्तिभाव से पूजन-अर्चन कर नगर भ्रमण के लिए निकाला गया।
शोभायात्रा के दौरान श्रद्धालु जयकारों, भजनों और मंत्रोच्चार के साथ आगे बढ़ रहे थे। सबसे आगे सजी-धजी नन्ही बालिकाएँ मंगल गीत गाते हुए चल रही थीं, जबकि विद्यासागर सर्वोदय पाठशाला के बच्चे धार्मिक चित्रों के साथ शोभायात्रा की शोभा बढ़ा रहे थे।
विभिन्न मंडलों का आकर्षक प्रदर्शन
🔸 महिला मंडल – भक्ति गीतों के साथ शोभायात्रा की भव्यता बढ़ाई।
🔸 युवा मंडल – दिव्य घोष वादन करते हुए नगरवासियों को आकर्षित किया।
🔸 श्रद्धालु भक्तगण – भगवान आदिनाथ की रजत पालकी को कंधों पर उठाए जयकारे लगाते रहे।
🔸 मुनिश्री अविचल सागर जी महाराज – भक्ति रस में लीन होकर भक्तों के साथ आगे बढ़ते रहे।
यात्रा प्रोसेसन रोड, सुराना पार्क, वजरिया मोहल्ला, गांधी पार्क जैसे प्रमुख स्थलों से होकर पुनः मंदिर परिसर में धर्मसभा में परिवर्तित हो गई।
“जीवन जीने की कला सिखाई राजा ऋषभदेव ने” – मुनि श्री अविचल सागर जी
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री अविचल सागर जी महाराज ने कहा कि राजा ऋषभदेव ने इस जगत को अषि, मषि, कृषि, विद्या, वाणिज्य एवं शिल्प जैसी महत्वपूर्ण विधाओं का ज्ञान दिया। उन्होंने बताया कि ऋषभदेव ने कृषि, चिकित्सा, शस्त्र विद्या, व्यापार और सुरक्षा जैसी आवश्यक कलाओं की शिक्षा देकर समाज को समृद्ध बनाया।
भगवान आदिनाथ को मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी ने दिया था दिव्य आसन
मध्यप्रदेश महासभा संयोजक विजय धुर्रा ने सभा में बताया कि मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने अपनी तपस्या और साधना के बल पर भगवान आदिनाथ को दिव्य सिंहासन प्रदान किया था।
🔹 प्रथम महामस्तकाभिषेक का सौभाग्य विमल कुमार विमल टेंडर्स एवं पवन जैन पत्रकार को प्राप्त हुआ।
🔹 प्रथम कलशाभिषेक वन्टी भाई बहुवली परिवार, रमेश चंद्र खोवदा, प्रेम चंद यश जैन, दिलीप भाई परिवार, प्रकाश चंद्र, संजय कुमार, अजय कुमार द्वारा संपन्न हुआ।
समापन एवं महाआरती
कार्यक्रम के अंत में मुनि श्री अविचल सागर जी महाराज ने सभी श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया। इस अवसर पर जैन समाज अध्यक्ष राकेश कासंल, उपाध्यक्ष अजित वरोदिया, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, संयोजक मनीष सिंघई सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
“ऋषभदेव के उपदेशों से ही जीवन जीना हुआ सरल” – मुनि श्री
मुनि श्री ने कहा कि ऋषभदेव ने ही संघ व्यवस्था, कृषि, हथकरघा, चिकित्सा और व्यापार की नींव रखी। उन्होंने समाज को जीने की सही दिशा दिखाई, जिससे मानव जीवन सरल और समृद्ध हो सका।
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