रिपोर्ट-अतुल कुमार जैन
शिवपुरी स्थित माधव टाइगर रिजर्व में हाल ही में बाघों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। 10 मार्च 2025 को पन्ना से लाई गई एक मादा बाघिन को रिजर्व में छोड़ा गया, जिससे यहां बाघों की कुल संख्या अब छह हो गई है। इसके अतिरिक्त, एक और नर बाघ को जल्द ही यहां लाने की योजना है।
बाघों की इस बढ़ती संख्या ने पर्यटकों के बीच माधव टाइगर रिजर्व की लोकप्रियता में इजाफा किया है। 10 मार्च से अब तक लगभग 400 से अधिक पर्यटक इस रिजर्व का दौरा कर चुके हैं, और विशेषकर सप्ताहांत में सफारी वाहनों को दिन में 49 राउंड तक चलाना पड़ रहा है। जुलाई 2024 से अब तक लगभग 10,000 से अधिक पर्यटक यहां आ चुके हैं।

बढ़ती पर्यटक संख्या को ध्यान में रखते हुए, रिजर्व प्रबंधन अब निजी ऑपरेटरों के माध्यम से जंगल सफारी कराने की योजना बना रहा है। इससे प्रबंधन को नए वाहनों की खरीद और उनके रखरखाव पर खर्च नहीं करना पड़ेगा, साथ ही स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। इसके लिए प्रबंधन बेहतर प्रस्तावों की प्रतीक्षा कर रहा है, ताकि यह तय किया जा सके कि सभी वाहनों का ठेका किसी एक कंपनी को दिया जाए या शुल्क निर्धारण के माध्यम से स्थानीय लोग अपने वाहन अटैच कर सकें।
सफारी वाहनों के संबंध में नियमों में भी लचीलापन लाया गया है। अब सामान्य वाहनों को मॉडिफाई कर सफारी वाहन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। पहले जंगल सफारी वाहन सिक्स प्लस वन (6+1) में पास होते थे, जिससे चालक के अलावा छह लोग बैठ सकते थे। अब इन्हें 2 प्लस 6 (2+6) में पास किया जा सकेगा, जिससे वाहन में अधिक लोग सफर कर सकेंगे।

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने प्रदेश के नौवें टाइगर रिजर्व के लोकार्पण समारोह के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से दो सफारी वाहनों की मांग की थी। प्रबंधन पहले इन वाहनों का इंतजार कर रहा था, लेकिन अब निजी ऑपरेटरों के माध्यम से सफारी कराने की योजना पर विचार किया जा रहा है।
इनका कहना…
“अब हम जंगल सफारी के लिए वाहन नहीं खरीदेंगे। वैसे भी अब जंगल सफारी के लिए विशेष वाहन का नियम खत्म हो चुका है, सामान्य वाहन को भी मॉडिफाई कराकर जंगल सफारी में इस्तेमाल किया जा सकता है। साथ ही अब जंगल सफारी वाहन 2 प्लस 6 में पास होगा। अब निजी ऑपरेटरों खुद वाहन लगाएंगे, इसलिए हमें वाहन खरीदने की जरूरत नहीं है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने लगी है इसलिए निजी वाहन आपरेटरों का रूचि दिखाना स्वाभाविक है।”
उत्तम शर्मा, निदेशक, सिंह परियोजना







