मध्यप्रदेश में दिल दहलाने वाली त्रासदी: एक साथ उठीं 7 अर्थियां, चीख-पुकार से गूंज उठा गांव

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रिपोर्ट-अतुल कुमार जैन
खनियांधाना | होली की उमंग, खुशियां और रंगों के बीच अचानक मातम पसर गया। शिवपुरी जिले के खनियांधाना थाना क्षेत्र के रजावन गांव में मंगलवार को जो घटना हुई, उसने पूरे गांव को गहरे शोक में डुबो दिया। गांव के 13 लोग बेतवा नदी में बने टापू स्थित सिद्ध बाबा मंदिर पर फाग खेलने जा रहे थे, लेकिन अचानक नाव पलटने से सात लोगों की मौत हो गई। इनमें चार छोटे-छोटे मासूम बच्चे और तीन महिलाएं शामिल थीं। इस घटना के बाद पूरे गांव में कोहराम मच गया। एक साथ सात अर्थियां उठीं तो हर किसी की आंखें नम हो गईं।

खुशियों से मातम में बदला माहौल
गांव के लोग हर साल होली के चौथे दिन सिद्ध बाबा मंदिर पर फाग खेलने जाते हैं। इस साल भी परंपरा के तहत गांव के 13 लोग नाव में सवार होकर मंदिर की ओर बढ़े। लेकिन जैसे ही नाव नदी में कुछ दूर पहुंची, उसमें पानी भरने लगा। महिलाओं और बच्चों ने जब यह देखा, तो घबराहट के कारण नाव का संतुलन बिगड़ गया, और देखते ही देखते नाव डूब गई। चीख-पुकार मच गई, लोग खुद को बचाने के लिए संघर्ष करने लगे। लेकिन दुर्भाग्य से सात लोग पानी में समा गए।
बचाव कार्य: आठ लोगों को जिंदा निकाला गया
घटनास्थल पर मौजूद शीतल जाटव और प्राणसिंह दूसरी नाव से लौट रहे थे। उन्होंने जब यह दर्दनाक मंजर देखा, तो तुरंत अपनी नाव मौके पर पहुंचाई और पानी में डूब रहे 8 लोगों को किसी तरह बाहर निकाल लिया। लेकिन सात लोग पानी के तेज बहाव में बह गए और उनकी मौत हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों की दर्दनाक आपबीती
14 साल के जॉनसन लोधी, जो नाव में सवार था और बच गया, ने बताया कि नाव पहले से ही कमजोर हालत में थी। उसमें पानी भरने लगा था, जिससे नाव असंतुलित हो गई और पलट गई। जॉनसन ने बताया, “मैं तैरना जानता था, इसलिए मैंने पानी में संघर्ष किया और अपनी मां सावित्री और ताई ऊषा को किसी तरह बचा लिया। लेकिन बाकी लोग डूब गए।”
रामदेवी लोधी, जो इस हादसे में बच गईं, ने कहा, “मैंने नाव में पानी भरने की बात नाविकों को बताई थी, लेकिन उन्होंने मेरी बात को मजाक में उड़ा दिया। कुछ देर बाद नाव डूबने लगी और मेरे अपने ही परिवार के सात लोग मेरी आंखों के सामने काल के गाल में समा गए।”
नाविकों की लापरवाही, प्रशासन की बड़ी चूक
घटना के बाद सामने आया कि नाव की हालत खराब थी और उसमें पहले से ही दरार थी। लेकिन नाविकों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब नाव डूबने लगी, तो नाविक प्रदीप और उसका एक साथी नाव छोड़कर तैरते हुए भाग गए, जिससे नाव में सवार लोगों में अफरा-तफरी मच गई और वे खुद को संभाल नहीं पाए।
प्रशासन की भी भारी लापरवाही सामने आई है। हर साल इस मंदिर पर गांव के लोग नाव से जाते हैं, इसके बावजूद प्रशासन ने सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए। ना ही लाइफ जैकेट उपलब्ध कराई गई और ना ही नाव की जांच की गई। अगर यह सब होता, तो शायद सात जिंदगियां नहीं जातीं।
शोक में डूबा गांव, प्रशासन पर उठे सवाल
इस हृदयविदारक घटना के बाद रजावन गांव में मातम छा गया है। होली की खुशी गम में बदल गई। गांव के लोगों ने प्रशासन की लापरवाही पर गुस्सा जताया और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
गांव के बुजुर्गों ने कहा कि वे वर्षों से इसी तरह इस मंदिर पर जाते रहे हैं, लेकिन इस बार हुई यह घटना असहनीय है। गांव के लोगों ने मांग की कि प्रशासन इस घटना की जिम्मेदारी ले और भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो, इसके लिए पुख्ता इंतजाम करे।

सरकार का आश्वासन, पीड़ित परिवारों को मिलेगी मदद
घटना की जानकारी मिलते ही प्रदेश के ऊर्जा मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर गांव पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर सांत्वना दी और कहा कि सरकार उनकी हर संभव मदद करेगी। साथ ही दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया।
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी घटना पर दुख जताया और प्रशासन को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। पिछोर विधायक प्रीतम लोधी, कलेक्टर रविंद्र चौधरी, एसपी अमन सिंह राठौड़ और अन्य अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया।
आगे की कार्रवाई और न्याय की मांग
फिलहाल पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम किया है और आगे जांच जारी है। स्थानीय लोग और मृतकों के परिवार न्याय की मांग कर रहे हैं। उन्होंने दोषी नाविकों और प्रशासन की लापरवाही के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील की है।
सबक और भविष्य की सुरक्षा
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि सुरक्षा में लापरवाही कितनी भयावह हो सकती है। यह हादसा एक चेतावनी है कि भविष्य में किसी भी नाव यात्रा में सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन किया जाए, नाव की जांच हो, लाइफ जैकेट पहनने की अनिवार्यता हो और प्रशासन भी ऐसे मामलों में सतर्कता बरते।
रजावन गांव के सात परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया। यह घटना उनकी जिंदगी में एक कभी न मिटने वाला घाव छोड़ गई। अब जरूरत इस बात की है कि प्रशासन इस त्रासदी से सबक ले और आगे से ऐसी दुर्घटनाएं न होने दे।

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Raju Atulkar
Author: Raju Atulkar

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