अतुल कुमार जैन
शिवपुरी | होली के बाद सहरिया आदिवासी समाज ने परंपरागत उल्लास और उत्साह के साथ फाग उत्सव मनाया। इस आयोजन में सैकड़ों आदिवासी समुदाय के लोग शामिल हुए, जिन्होंने रंग-गुलाल उड़ाकर पर्व की खुशियां साझा कीं। इस आयोजन में शिवपुरी, करेरा, पोहरी, बदरवास, पनिहार, मुरैना, श्योपुर और ग्वालियर से भारी संख्या में लोग पहुंचे।
फाग उत्सव के दौरान पूरे क्षेत्र में ढोलक, मांदल और अन्य पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनें गूंजती रहीं। पुरुष और महिलाएं पारंपरिक राई नृत्य में झूमते नजर आए। लोकगीतों की मधुर स्वर लहरियों ने पूरे वातावरण को संगीतमय बना दिया। ग्रामीणों ने अपने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ इस उत्सव को जीवंत कर दिया।

सहरिया क्रांति के संयोजक संजय बेचैन ने अपने संबोधन में कहा कि यह आयोजन केवल एक पर्व नहीं, बल्कि सहरिया समाज की एकता और सांस्कृतिक धरोहर का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस तरह के उत्सवों से समाज में भाईचारा मजबूत होता है और हमारी परंपराएं पीढ़ी दर पीढ़ी संरक्षित रहती हैं।
बुजुर्गों के अनुभव और युवाओं की भागीदारी
उत्सव में विजय भाई आदिवासी, कल्याण आदिवासी, औतार भाई सहरिया, भदौरिया आदिवासी, कारु आदिवासी, मोहरसिंह आदिवासी, गणेश आदिवासी, नीलेश आदिवासी और शिशुपाल आदिवासी सहित कई प्रमुख कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। बुजुर्गों ने अपनी संस्कृति से जुड़े अनुभव साझा किए और युवाओं को अपनी परंपराओं को आगे बढ़ाने की प्रेरणा दी।
पारंपरिक गीतों और नृत्य की धूम








