रिपोर्ट-अतिथि संवाददाता
टोंक, राजस्थान के श्री निर्मल जैन ने 50 वर्ष की आयु के बाद से जैन धर्म के पवित्रतम तीर्थ शाश्वत सिद्ध क्षेत्र श्री सम्मेदशिखरजी की वंदना का संकल्प लिया। अब तक, 69 वर्ष की आयु तक उन्होंने 350 से अधिक बार सम्मेदशिखरजी की पदयात्रा एवं सात परिक्रमा पूर्ण कर ली हैं।

दिल्ली के एडवोकेट अजय जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि श्री निर्मल जैन की यह आध्यात्मिक यात्रा केवल एक तीर्थयात्रा नहीं, बल्कि अनुशासन, समर्पण और अटूट आस्था का प्रतीक है।

श्री निर्मल जी ने अब तक 350 से अधिक बार सम्मेद शिखर जी की पूर्ण पैदल वंदना संपन्न की है। इसका अर्थ है कि उन्होंने बिना किसी वाहन, डोली या अन्य सहायता के पैदल ही पहाड़ की चढ़ाई और उतराई पूरी की। इतना ही नहीं, इस दौरान उन्होंने कुछ भी खाया या पिया तक नहीं, पूर्ण तपस्वी साधना के रूप में इस वंदना को निभाया।

इसके अलावा, पिछले 10 वर्षों में उन्होंने पूरे सम्मेद शिखर जी पर्वत की सात बार संपूर्ण पैदल परिक्रमा भी की है, जो अपने आप में एक अतुलनीय आध्यात्मिक उपलब्धि है।

श्री सम्मेदशिखरजी जैन धर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ है, जहां 24 में से 20 तीर्थंकरों ने मोक्ष प्राप्त किया। यह तीर्थ झारखंड के पारसनाथ पर्वत पर स्थित है और संपूर्ण जैन समाज के लिए परम श्रद्धा का केंद्र माना जाता है।








