रिपोर्ट-सौरभ जैन
भोपाल | मंगलवार को भक्तामर स्त्रोत्र के रचयिता मानतुंगाचार्य जी की तपोस्थली एवं प्राचीन व अतिशयकारी १००८ शांतिनाथ भगवान के पावन चरणों में मैना सुंदरी संभाग द्वारा आचार्य श्री १०८ विद्यासागर जी महामुनिराज के प्रथम समाधि स्मृति दिवस पर विभिन्न धार्मिक आयोजन किए गए। इस पावन अवसर पर भक्तामर विधान, शांतिनाथ विधान एवं आचार्य श्री १०८ विद्यासागर जी महामुनिराज की विशेष पूजन इत्यादि विधिपूर्वक संपन्न की गई।

रैली में हथकरघा की साड़ियों और सिद्धांत तख्तियों के साथ दिया आध्यात्मिक संदेश

विधान के उपरांत, श्रद्धालु भक्तों ने आचार्य श्री के मूल सिद्धांतों को दर्शाने वाली तख्तियां लेकर एक विशाल धार्मिक रैली निकाली। इस रैली में सभी महिलाएं हथकरघा की पारंपरिक साड़ियां धारण किए हुए थीं, जिससे भारतीय संस्कृति और स्वदेशी वस्त्रों के प्रति जागरूकता का संदेश भी दिया गया।
गौसेवा में योगदान

गौसेवा को आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने अपने जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान दिया था। उनकी स्मृति में गौशाला में जाकर गायों के आहार हेतु ₹26,300 की राशि दान की गई। साथ ही, गौशाला में कार्यरत कर्मचारियों को छह जोड़ पेंट-शर्ट और साड़ियां वितरित कर उनका सम्मान किया गया।
आध्यात्मिक समर्पण और सामाजिक सहभागिता

इस पुण्य कार्य में वरिष्ठ प्रांतीय उपाध्यक्ष हीरामणि जी, प्रांतीय उपाध्यक्ष श्रीमती वंदना सिंघई, प्रांतीय संगठन मंत्री श्रीमती अनीता जैन, संभागीय अध्यक्ष श्रीमती जयंती जैन, संभागीय सचिव श्रीमती संगीता तारण, शोभा हाथीशाह, ललित मनया सहित मैना सुंदरी संभाग की कई श्रद्धालु महिलाएं— जैसे कि तृतु जैन, श्रीमती रिंकी जैन, संध्या कांड़या, सरिता जैन, प्रज्ञा जैन, श्रुतिका गुणमाला जैन इत्यादि उपस्थित रहीं।

यह पूरा आयोजन आचार्य श्री की स्मृति को समर्पित रहा, जिसमें धार्मिक श्रद्धा, सामाजिक सेवा और आध्यात्मिकता का अद्भुत समागम देखने को मिला।






