रिपोर्ट-अतुल कुमार जैन
शिवपुरी | बामौर कलां में सोमवार को एक ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला जब समाधि सम्राट आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महामुनिराज एवं आचार्य श्री 108 समय सागर जी महामुनिराज के शिष्य, मुनि श्री 108 अविचल सागर महाराज अपने संघ सहित नगर में पधारे। उनके मंगल प्रवेश के अवसर पर पूरे नगर में भक्ति और उल्लास का माहौल देखने को मिला।

मुनि श्री के आगमन को लेकर नगरवासियों में भारी उत्साह था। हर्सरा चौराहे पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित हुए, जहां मुनि श्री निरापद सागर जी ने उनकी मंगल आगवानी की। पुरुषों ने श्वेत वस्त्र धारण किए थे, जबकि महिलाएं केसरिया साड़ियों में सजी थीं, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक आभा से आलोकित हो उठा।

नगर में जगह-जगह रंगोली सजाई गई थी, और मंगल ध्वनियों के साथ शोभायात्रा निकाली गई। सौगात बैंड की मधुर धुनों और भक्तिपूर्ण नारों के बीच मुनिश्री का भव्य स्वागत किया गया।
प्रवचन में जीवन मूल्यों पर दिया संदेश
मंगल प्रवेश के उपरांत मंदिर में विशेष धर्मसभा आयोजित की गई, जहां मुनि श्री अविचल सागर जी ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। अपने प्रवचन में उन्होंने जीवन के आदर्शों और मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा

“सच्ची सेवा वही है, जो स्वार्थ से परे हो। हमें अपने जीवन में उच्च आदर्शों और नैतिक मूल्यों को अपनाकर समाज के कल्याण में योगदान देना चाहिए।”
समाज में नई ऊर्जा का संचार
इस पावन अवसर पर सकल दिगंबर जैन समाज के सदस्य, युवाओं से लेकर वृद्धों तक, सभी श्रद्धालु श्रद्धा और समर्पण के भाव से जुड़े रहे। मुनिश्री के सान्निध्य में नगरवासियों ने आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया और यह संकल्प लिया कि वे धर्म मार्ग पर चलते हुए समाज में सकारात्मक बदलाव लाएंगे।






