रिपोर्ट-अंशुल जैन
भोपाल | “अवसर मिलना पुण्य का प्रताप है, अवसर का लाभ उठाना जीवन का प्रसाद है और अवसर को खो देना प्रमाद है।” ये उद्गार 1100 क्वार्टर से नेहरू नगर जैन मंदिर पहुंचे। मुनि श्री १०८ प्रमाण सागर जी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने उक्त बात जीवन में अवसरों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कही। उनके विचारों ने श्रद्धालुओं को जीवन में मिले हर अवसर का सदुपयोग करने की प्रेरणा दी।

उल्लेखनीय है की टीटी नगर में 15 से 20 फरवरी तक आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनिश्री प्रमाण सागर जी मुनिराज ससंघ के सानिध्य में पंचकल्याणक महोत्सव संपन्न होना है। इसी की पूर्व तैयारियों में भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। इस पावन अवसर से पहले विभिन्न धार्मिक रस्में पूरी की जा रही हैं, जिनमें हल्दी-मेहंदी की रस्म विशेष आकर्षण का केंद्र बनी।
भक्ति के रंग में सराबोर हुआ माहौल

महोत्सव के प्रमुख पात्रों को मंगलकारी मेंहदी और हल्दी का शगुन दिया गया। आयोजन समिति के मीडिया प्रभारी मीडिया प्रभारी सुनील जैनाविन और अंशुल जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि इस पवित्र अनुष्ठान के तहत पूरे समाज में उत्साह और उमंग का माहौल बना हुआ है। ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो पूरा क्षेत्र भक्ति के रंग में रंग चुका हो। इस अवसर पर “मेहंदी लागी रे लागी गुरुवर नाम की” भजन पर भक्तिपूर्ण नृत्य किया गया, जिससे समूचा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।
धार्मिक रस्मों में समाज की व्यापक भागीदारी

पंचकल्याणक अनुष्ठान के अंतर्गत मुख्य पात्रों में राजेश्वरी ऋषभ माता-पिता, सारिका-राजेश, सोधर्म इंद्र-इंद्राणी, माया-अमर जैन, कुबेर इंद्र, श्रीमती रंजना-सुनील जैन राजहंस, भरत चक्रवर्ती सहित अन्य श्रद्धालु शामिल हुए। समाज के लोगों ने मिलकर रस्मों को विधिपूर्वक संपन्न किया, जिससे आयोजन की गरिमा और अधिक बढ़ गई।
कस्तूरबा नगर जिनालय में गोद भराई की रस्म
भगवान के माता-पिता, नाभिराय और मरुदेवी की भूमिका निभा रहे श्रद्धालु राजेश्वरी ऋषभ जैन व प्रगति जैन के लिए कस्तूरबा नगर जैन मंदिर में पारंपरिक गोद भराई की रस्म संपन्न हुई। मंगल गीतों के बीच समाजजनों ने इस शुभ रस्म को श्रद्धा और भक्ति के साथ निभाया। मंदिर समिति के अध्यक्ष सुनील जैनाविन ने बताया कि यह रस्म भगवान सुपारसनाथ के दर्शन के साथ प्रारंभ हुई।
समाज की सक्रिय भागीदारी
इस समारोह में केवल चंद्र जैन, शील चंद्र जैन, अंकेश जैन, पी.सी. जैन, देव कुमार गुड़ा, सुधीर जैन, आशीष जैन, डॉ. राजेंद्र जैन, मनीष जैन, विजय कांडया, देवेंद्र जैन, संदीप जैन सहित समाज के प्रतिष्ठित सदस्य और सशक्त महिला मंडल की सदस्य उपस्थित रहीं।
अन्य जिनालयों में भी धार्मिक अनुष्ठान








