@सूरज मेहरा
नई दिल्ली | दिल्ली विधानसभा चुनाव का प्रचार शोर थम चुका है, और मतदान की घड़ी नजदीक आ गई है। एक समय यह मुकाबला आम आदमी पार्टी (आप) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच सीधा माना जा रहा था, जबकि कांग्रेस को हाशिए पर देखा जा रहा था। हालांकि, कांग्रेस नेतृत्व ने निर्णय लिया कि वे भाजपा को रोकने के लिए आप को सीधा रास्ता नहीं देंगे और चुनाव को त्रिकोणीय बनाने के लिए अपने प्रमुख नेताओं को मैदान में उतारेंगे। शुरुआती हिचकिचाहट के बाद, लगभग 18 कांग्रेस नेताओं ने चुनावी रण में कदम रखा।

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संदीप दीक्षित की सक्रियता से कांग्रेस में नई उम्मीदें
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नई दिल्ली सीट पर केजरीवाल को कड़ी टक्कर
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की चुनावी मैदान में वापसी
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दिल्ली चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना बढ़ी
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अल्पसंख्यक वोट बैंक की वापसी से कांग्रेस को संजीवनी
नई दिल्ली विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के पुत्र संदीप दीक्षित को उम्मीदवार बनाया है। संदीप दीक्षित, जो 2004 और 2009 में पूर्वी दिल्ली से सांसद रह चुके हैं, ने अपने सरल और सहज व्यक्तित्व, डोर-टू-डोर कैंपेन, दिल्ली की समस्याओं की गहरी समझ और अपनी मां की लोकप्रिय विरासत के साथ चुनावी माहौल में नई ऊर्जा का संचार किया है। उनकी सक्रियता ने अरविंद केजरीवाल को उनकी ही सीट पर चुनौतीपूर्ण स्थिति में ला दिया है। चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में, यह धारणा मजबूत हो गई है कि संदीप दीक्षित नई दिल्ली सीट पर बड़ा उलटफेर कर सकते हैं।

संदीप दीक्षित के प्रभावी प्रचार और जनता के सकारात्मक प्रतिक्रिया ने कांग्रेस के अन्य उम्मीदवारों में भी उत्साह भर दिया है। अब पार्टी को नांगलोई से रोहित चौधरी, बादली से देवेंद्र यादव, पटपड़गंज से अनिल चौधरी और कस्तूरबा नगर से अभिषेक दत्त जैसी सीटों पर जीत की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त, अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में भी कांग्रेस अपने पुराने वोट बैंक को आप से वापस हासिल करती दिख रही है।







