रिपोर्ट – राजू अतुलकर
प्रयागराज | संस्कार सेना, जो समाज में नैतिक मूल्यों और धर्म के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए प्रतिबद्ध है, ने आगामी अमृत महाकुंभ महापर्व में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का निर्णय लिया है। संस्था का मुख्य उद्देश्य है कि युवा पीढ़ी को माता-पिता के सम्मान, सनातन धर्म और सांस्कृतिक आस्थाओं के प्रति जागरूक किया जाए। इसके तहत संस्कार सेना एक विशेष सम्मान कार्यक्रम आयोजित करने जा रही है, जिसमें देशभर के प्रमुख 101 संत-महात्माओं को सम्मानित किया जाएगा।
संस्था के संस्थापक अध्यक्ष हरभजन जांगडे ने जानकारी देते हुए बताया कि समारोह में विशेष रूप से श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर बाल योगी बालकृष्ण दास त्यागी जी महाराज और श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर श्री राम भूषण दास जी महाराज को सम्मानित किया जाएगा। ये संत न केवल धार्मिक आस्थाओं के प्रतीक हैं, बल्कि समाज में आदर्श मूल्य और भक्ति के प्रचार-प्रसार में भी सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं। इनके योगदान से समाज में शांति, सद्भावना और एकता की भावना को बल मिला है।
संस्कार सेना की पहल: अमृत महाकुंभ में 101 संतों का सम्मान
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धर्म और संस्कृति के प्रति जागरूकता :
संस्कार सेना का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को धर्म, संस्कृति, और नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूक करना है।
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101 संतों का सम्मान :
अमृत महाकुंभ में देशभर के 101 प्रमुख संत-महात्माओं को विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा।
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प्रमुख संतों की भागीदारी :
समारोह में श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर बाल योगी बालकृष्ण दास त्यागी जी महाराज और श्री राम भूषण दास जी महाराज जैसे संतों को विशेष सम्मान मिलेगा।
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144 वर्षों में एक बार का अवसर :
यह महाकुंभ हर 144 वर्षों में आने वाला ऐतिहासिक धार्मिक पर्व है, जो सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए विशेष महत्व रखता है।
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युवा पीढ़ी को प्रेरणा :
संस्कार सेना ने युवाओं को धर्म, नैतिकता, और पारिवारिक मूल्यों का महत्व समझाने का संकल्प लिया है।
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समाज में एकता और शांति का संदेश :
यह आयोजन समाज में शांति, सद्भावना, और एकता को बढ़ावा देने के साथ-साथ धर्म और परंपराओं का सम्मान सिखाने का माध्यम बनेगा।
सस्था के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रकाश दुबे ने कहा कि अमृत महाकुंभ का आयोजन सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए एक ऐतिहासिक और धार्मिक महापर्व है। यह कुम्भ पर्व प्रत्येक 12 वर्ष के अन्तराल में आयोजित होता है। परन्तु 2024 के ईस कुम्भ को महाकुंभ के रूप में मान्य किया गया है क्योंकि ईस प्रकार का संयोग प्रत्येक 144 वर्षों के अंतराल पर आता है । इस बार करोड़ों भक्त और लाखों-लाख साधु-संत एकत्रित होंगे। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्थाओं का प्रतीक है, बल्कि समाज में एकता और शांति की भावना को बढ़ावा देने का भी एक बड़ा अवसर प्रदान करता है।







