साथियों मैं आज आपके समक्ष रख रही हूं, एक ऐसा इंटरव्यू जो हिला सकता है, बहुतों का दिमाग व जला सकता है, दिमाग की बत्ती।
जी हां आज मेरा विषय है –
‘नशा एक अभिशाप : भ्रांतियां और हकीकत’
मित्रों नशा नाश का मूल है और यह किसी भी समाज के नकारात्मक विकास का पैमाना है।
क्योंकि एक बंदर होता है वह भी अपने बच्चों को साथ लेकर घूमता है लेकिन नशेड़ी व्यक्ति को अपनी मां, बहन व बेटी की इज्जत का भी भान नहीं रहता।









