गुजरात में बंधक बनाए गए चार आदिवासी मजदूर मुक्त, गांव में खुशी का माहौल, सहरिया क्रांति और पुलिस ने रच दिया इतिहास

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रिपोर्ट-अतुल कुमार जैन
शिवपुरी | गुजरात के हिम्मतनगर स्थित एमारोन कंपनी में बंधुआ मजदूरी में फंसे चार आदिवासी मजदूरों को सहरिया क्रांति और पुलिस की टीम ने संयुक्त प्रयास से मुक्त कराया। इन श्रमिकों को आज सकुशल उनके गांव भड़ावावड़ी (थाना सुरवाया, जिला शिवपुरी) लाया गया। उनके लौटते ही गांव में जश्न और भावनाओं का ऐसा सैलाब उमड़ा, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं।

गांव पहुंचते ही परिजनों ने अपने बच्चों का स्वागत फूल-मालाओं और नारियल उतारने की रस्म से किया। माताओं ने बच्चों को गले लगाकर अश्रुपूरित आंखों से अपनी व्यथा व्यक्त की। गांव में यह दृश्य हर किसी के दिल को छू गया। सहरिया क्रांति के संयोजक संजय बेचैन ने इन श्रमिकों को अपनी छत्रछाया में लेते हुए उनकी सुरक्षा और भविष्य के प्रति जागरूक किया।

बंधुआ मजदूरी की दर्दनाक कहानी

मामले की शुरुआत तब हुई जब मजदूरों के परिवारों ने सहरिया क्रांति के कार्यकर्ताओं—अजय, स्वदेश, और दिलीप आदिवासी के साथ मिलकर शिवपुरी के पुलिस अधीक्षक अमन सिंह राठोड़ को शिकायत दी। शिकायत के अनुसार, गांव के चार मजदूर—गौतम, अवनेश, सुनील और बल्ले आदिवासी (जिनमें तीन नाबालिग थे)—को दो माह पहले दलाल अनूप राजपूत उर्फ सुशील ने बेहतर रोज़गार का झांसा देकर गुजरात भेजा था।

दलाल ने इन मजदूरों और उनके परिवारों को वादा किया था कि उन्हें ₹20,000 मासिक वेतन और भोजन-आवास की सुविधा दी जाएगी। लेकिन हकीकत में उन्हें बंधक बनाकर अमानवीय परिस्थितियों में काम कराया गया। उनके मोबाइल छीन लिए गए, और बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह काट दिया गया।

सहरिया क्रांति और पुलिस का प्रभावशाली अभियान

शिकायत मिलने के बाद पुलिस अधीक्षक ने थाना प्रभारी अरविंद छारी के नेतृत्व में एक टीम गठित की। सहरिया क्रांति के सक्रिय सदस्यों ने पुलिस के साथ मिलकर गुजरात में दबिश दी और कठिन प्रयासों के बाद चारों मजदूरों को मुक्त कराया। उनकी सकुशल वापसी ने पूरे क्षेत्र में सहरिया क्रांति और पुलिस की सराहना की लहर पैदा कर दी।

आगे की सीख और सतर्कता

सहरिया क्रांति के संयोजक संजय बेचैन ने कहा, “यह घटना हमें सजग करती है कि हमें दलालों के झूठे वादों के प्रति सतर्क रहना होगा। बच्चों के भविष्य की रक्षा के लिए समाज को एकजुट होकर अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना पड़ेगा।” उन्होंने प्रशासन से अपील की कि मानव तस्करी जैसे मामलों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

गांव में उत्सव का माहौल

चारों मजदूरों के सुरक्षित लौटने पर गांव में खुशी का माहौल है। परिजनों ने सहरिया क्रांति और पुलिस के प्रति आभार जताया। गांववालों ने यह प्रण लिया कि भविष्य में किसी संदिग्ध व्यक्ति पर भरोसा नहीं करेंगे। यह संयुक्त अभियान न केवल मजदूरों की आजादी का प्रतीक बना, बल्कि मानव तस्करी के खिलाफ लड़ाई में नई उम्मीद भी जगाई।
इनका कहना है…
“आवेदन प्राप्त होते ही हमने मामले की जांच की तो पाया नरवर के पास एरावन का अनूप राजपूत इन लोगों को मजदूरी के बहाने ले गया था और वहाँ जाकर इनको एक फ़ेक्टरी में छोड़ा। पुलिस ने स्थानीय स्तर पर व गुजरात पुलिस से संपर्क कर दवाव बनाया तो बच्चे अपने जीएचआर पहुँच गए है।”
अरविंद छारी ,थाना प्रभारी सुरवाया

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Author: Tejas Reporter

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