विवाह पंजी संधारण : सरपंच व सचिवों के लिए विवाह पंजीकरण जागरूकता एवं उन्मुखीकरण सत्र

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रिपोर्ट-राकेश कुमार जैन
रायसेन | जिला पंचायत सभाकक्ष में शुक्रवार को विवाह पंजी संधारण विषय पर सरपंच और सचिवों का एकदिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्राम पंचायतों में विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया को बढ़ावा देना और बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों को समाप्त करना था।
जिला पंचायत अध्यक्ष यशवंत मीणा ने कहा, “गांवों में विकास केवल सड़कों और नालियों तक सीमित नहीं है। सच्चा विकास तभी संभव है, जब हम समाज में फैली कुरीतियों को जड़ से समाप्त करें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने के लिए आत्मनिर्भर गांवों का निर्माण आवश्यक है।”
                                             कार्यक्रम के दृश्य
  • ग्राम विकास का नया सूत्र : विवाह पंजीकरण पर जोर
  • सामाजिक बुराइयों के उन्मूलन से बनेगा आत्मनिर्भर गांव
  • विवाह प्रमाण पत्र को बताएं सबसे बड़ा उपहार
  • बाल विवाह रोकथाम : कानून से समाज तक की जिम्मेदारी
  • बाल हितैषी आदर्श जिला बनाने की दिशा में ठोस कदम

विवाह पंजीकरण : संवैधानिक अधिकारों का प्रतीक

जिला पंचायत की सीईओ अंजू पवन भदोरिया ने विवाह पंजीकरण को जन्म और मृत्यु पंजीकरण से भी अधिक महत्वपूर्ण बताते हुए कहा, “यह न केवल एक कानूनी दस्तावेज है, बल्कि यह महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों, शिक्षा और सुरक्षा का प्रमाण भी है। यदि विवाह के समय ही प्रमाण पत्र दिया जाए, तो यह वर-वधु के लिए सबसे बड़ा उपहार होगा।”

बाल विवाह रोकथाम : सबकी साझी जिम्मेदारी

महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी दीपक संकत ने बाल विवाह को सामाजिक बुराई और कानूनन अपराध बताते हुए कहा, “हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि माता-पिता के मन में बाल विवाह का विचार भी न आए। इसके लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। बाल विवाह मुक्त पंचायत और जिला बनाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।”

प्रमाण पत्र के साथ विवाह का उत्सव :

जिला सांख्यिकी अधिकारी अशोक रिछारिया ने विवाह पंजीकरण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सरपंच और सचिव विवाह के समय ही वर-वधु को प्रमाण पत्र दें। यह न केवल उनके वैवाहिक जीवन की शुरुआत को विशेष बनाएगा, बल्कि समाज में विवाह पंजीकरण के प्रति जागरूकता भी बढ़ाएगा।

सामाजिक सहभागिता से बाल हितैषी जिले का निर्माण :

एक्सेस टू जस्टिस संस्था के जिला समन्वयक अनिल भवरे ने बताया कि उनका संगठन बाल विवाह, बाल शोषण और बाल श्रम जैसे मुद्दों पर काम कर रहा है। “सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने के लिए सभी की सहभागिता आवश्यक है। हमें बाल विवाह मुक्त पंचायत और जिला बनाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे,” उन्होंने कहा।
कार्यक्रम में जिले के 21 पंचायतों से 45 सरपंच और सचिवों ने भाग लिया। इस दौरान विवाह पंजीकरण प्रक्रिया, बाल विवाह रोकथाम, और सामाजिक सुधारों के महत्व पर गहन चर्चा की गई। कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि ग्राम विकास के लिए सामाजिक जागरूकता और सामूहिक प्रयास सबसे जरूरी हैं।

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Author: Tejas Reporter

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