रिपोर्ट-अतुल कुमार जैन
पिछोर | सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पिछोर में लंबे इंतजार के बाद दो साल बाद सीजर प्रसव की सुविधा का पुनः शुभारंभ हुआ। शुक्रवार को दो हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं ने सुरक्षित प्रसव के माध्यम से स्वस्थ शिशुओं को जन्म दिया। इन सफलताओं का श्रेय जिला चिकित्सालय शिवपुरी से भेजे गए विशेषज्ञ डॉक्टरों और मेडिकल टीम के प्रयासों को जाता है।

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पिछोर में दो साल बाद सीजर से सुरक्षित प्रसव, दो महिलाओं ने जन्म दिए स्वस्थ बच्चे।
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सीजर प्रसव की सुविधा शुरू, पिछोर की स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा सुधार।
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हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी में उम्मीद की किरण: पिछोर में सुरक्षित मातृत्व का संदेश।
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जिला चिकित्सालय शिवपुरी की मदद से पिछोर में फिर शुरू हुए सीजर प्रसव।
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पिछोर स्वास्थ्य केंद्र में सफलता की कहानी: दो माताएं बनीं नवजातों की जननी।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय ऋषिश्वर ने बताया कि पिछोर विकासखंड में प्रतिमाह करीब 350 प्रसव होते हैं। इनमें से कई महिलाएं जटिल परिस्थितियों में होती हैं, जिन्हें अब तक जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज, शिवपुरी रेफर करना पड़ता था। पिछोर में सीजर प्रसव की सुविधा बहाल करने के लिए कलेक्टर रविंद्र कुमार चौधरी और वरिष्ठ संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं श्रीमती अर्चना मिश्रा ने विशेष निर्देश जारी किए थे।

हालांकि, पिछोर में एनेस्थेटिक विशेषज्ञ की कमी के कारण यह सुविधा रुकी हुई थी। इस समस्या के समाधान के लिए जिला चिकित्सालय से निशचेतना विशेषज्ञ डॉ. आर.पी. सिंह को आन-काल पिछोर भेजा गया। उनके साथ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. ब्रजेश शर्मा और डॉ. दीपा दुबे, नर्सिंग ऑफिसर्स और ओटी अटेंडर्स ने मिलकर यह सफलता हासिल की।
दो माताओं ने पाया मातृत्व का सुख :
सीजर प्रसव के अंतर्गत ग्राम भगवंतपुरा की वंदना पाल और ग्राम बनोटा की पूजा लोधी ने स्वस्थ शिशुओं को जन्म दिया। वंदना और पूजा, दोनों ही पहली बार मां बनीं। उनके बच्चों का सिर बड़ा होने के कारण सामान्य प्रसव संभव नहीं था, जिसके चलते सीजर प्रक्रिया अपनाई गई। दोनों प्रसूताओं और नवजातों की स्थिति अब पूरी तरह से सामान्य है।
स्वास्थ्य सेवाओं में नए आयाम :
पिछोर में दोबारा सीजर सुविधा शुरू होने से स्थानीय निवासियों को बड़ी राहत मिली है। यह कदम न केवल मातृत्व सुरक्षा को सुनिश्चित करता है, बल्कि हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों में महिलाओं को बेवजह अन्यत्र रेफर किए जाने से भी बचाता है। स्थानीय लोगों ने इस पहल के लिए प्रशासन और चिकित्सा विभाग का आभार व्यक्त किया है।








