रिपोर्ट-बीपीआर
पटना | बिहार की राजधानी पटना से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित, पटना सिटी के जिया तमोलिन गली की तंग गलियों में छिपा हुआ एक ऐतिहासिक और चमत्कारी धरोहर है—600 वर्षों पुराना श्री चंद्रप्रभु जी दिगंबर जैन मंदिर।
इस मंदिर की मुख्य वेदी पर भगवान चंद्रप्रभु स्वामी की पवित्र प्रतिमा विराजमान है, जिनकी महिमा असीम है। साथ ही, गुप्तकालीन भगवान पार्श्वनाथ की अद्वितीय प्रतिमा समेत लगभग तीन दर्जन प्राचीन मूर्तियां इस वेदी की शोभा बढ़ा रही हैं। इसके अतिरिक्त, भगवान आदिनाथ की अत्यंत प्राचीन प्रतिमा भी अलग वेदी पर प्रतिष्ठित है, जो इस मंदिर के महत्व को और भी बढ़ाती है।
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600 वर्षों पुराना चमत्कारी जैन मंदिर: जानिए इसका महत्व और नवीनीकरण कार्य
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भगवान चंद्रप्रभु स्वामी के मंदिर का भव्य रूपांतरण: हर साधर्मी का योगदान आवश्यक
मंदिर जीर्णोद्धार में ऐतिहासिक पहल :
श्री चंद्रप्रभु स्वामी मंदिर के संरक्षण और सौंदर्यीकरण का कार्य बिहार स्टेट दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी की देखरेख में किया जा रहा है।
पहला चरण: मंदिर के चारों ओर की जमीन को भव्य ग्रेनाइट पत्थरों से सुसज्जित किया गया है।
वास्तु दोष निवारण के लिए भगवान के समक्ष सीधा प्रवेश मार्ग बनाकर एक भव्य प्रवेश द्वार का निर्माण किया गया है।
विशाल शिखर को नवीनीकरण कर इसके रंग-रोगन का कार्य पूरा कर लिया गया है।
मूल वेदी का नया स्वरूप तैयार किया गया है और दो नवीन वेदियों की स्थापना की गई है।
अगले चरण में, शुभ मुहूर्त निकालकर मुनि महाराजों की सानिध्य में वेदियों की शुद्धि कराई जाएगी। इसके पश्चात भगवान आदिनाथ और भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमाओं को उनके नवनिर्मित वेदियों पर विराजित किया जाएगा।
समर्पण और सहयोग की आवश्यकता :
इस प्राचीन एवं अतिशयकारी तीर्थ के जीर्णोद्धार कार्य को पूर्ण करने के लिए अभी भी व्यापक सहयोग की आवश्यकता है। यह हम सभी का कर्तव्य है कि अपने धार्मिक धरोहरों को संरक्षित करने के लिए आगे आएं और मुक्त हस्त से योगदान दें। जब तक साधर्मी बंधु सक्रिय होकर समर्थन नहीं करेंगे, हमारे प्राचीन तीर्थ और मंदिर विलुप्त होने की कगार पर पहुंच सकते हैं।






